लखीसराय। मुंगेर से भागलपुर के कहलगांव तक के गंगा नदी को सरकार ने डॉल्फिन के लिए सुरक्षित जोन घोषित कर रखा है। डॉल्फिन को सरकार ने राष्ट्रीय जल जीव घोषित कर रखा और इसकी सुरक्षा सरकार के स्तर से की जाती है। लेकिन बुधवार को जानकारी के अभाव में कुछ ग्रामीणों ने एक डॉल्फिन को मार डाला। गंगा नदी के जल स्तर में वृद्धि के कारण यह डॉल्फिन मुख्य धारा से भटक कर किऊल नदी में आ गई थी।

बुधवार की सुबह नदी का जलस्तर घटते ही चानन प्रखंड क्षेत्र के खुटुपार पंचायत अंतर्गत किऊल नदी के वंशीपुर घाट पर स्थानीय ग्रामीणों की नजर डॉल्फिन पर पड़ी। बड़ी मछली समझकर ग्रामीणों ने उसे पानी से निकाल कर गांव ले आए। इसके बाद वहां देखने वालों की भीड़ लग गई। ग्रामीण विधोचू शर्मा, राजेश कुमार, राजो मंडल, सुधांशु कुमार, इसाद अंसारी आदि के अनुसार वे लोग घड़ियाल समझाकर डॉल्फिन को गांव ले आए। जब बात मीडिया में आई तो डीएम शोभेंद्र कुमार चौधरी के आदेश पर वन विभाग के वनपाल एसके सोरेन ने वंशीपुर गांव पहुंच कर जल जीव की पहचान डॉल्फिन (सूंस) के रूप में की। उन्होंने वन विभाग के रेंजर संजीव कुमार को इसकी सूचना दी। सूचना पर रेंजर संजीव कुमार दल-बल के साथ पहुंचे और डॉल्फिन को अपने कब्जे में लेकर उसे ट्रैक्टर से मोहनकुंडी के पास किऊल नदी के गहरे पानी में छोड़ दिया। लेकिन उसे पकड़ने के दौरान लाठी से की गई पिटाई के कारण उसकी मौत पानी के अंदर हो गई। शाम को वह मृत होकर लखीसराय के सूर्यदेव घाट किनारे पड़ी मिली। यहां भी सैकड़ों लोगों की भीड़ उसे देखने को लग गई। फिर लखीसराय थाना से पुलिस पदाधिकारी ने डॉल्फिन को थाना ले आया। रेंजर संजीव कुमार ने बताया कि सरकार ने इसे सुरक्षित जल प्राणी घोषित किया है। लेकिन इसकी मौत हो गई। अब पशुपालन विभाग के चिकित्सक के द्वारा इसका पोस्टमार्टम कराया जाएगा।

Posted By: Jagran