-जल-जीवन-हरियाली योजना का शुरू हुआ काम, उड़ाही से पहले ही उलझा रजिस्ट्री कचहरी का तालाब

-210 हेक्टेयर क्षेत्र में दो लाख दस हजार पौधा लगाने का चल रहा कार्य, लगाया गया 1,190 बांस गैबियन संवाद सहयोगी, लखीसराय : जिले में जल-जीवन-हरियाली योजना को लेकर बनाई गई कार्ययोजना पर कार्य शुरू हो गया है। हालांकि अभी इसकी रफ्तार काफी धीमी है। लेकिन सरकार द्वारा जिस तरह इसकी लगातर समीक्षा की जा रही है। उससे उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में योजना रफ्तार पकड़ेगी। जिले के प्रभारी मंत्री नीरज कुमार एवं जिलाधिकारी शोभेन्द्र कुमार चौधरी द्वारा जल-जीवन-हरियाली योजना की लगातार समीक्षा की जा रही है। 26 अक्टूबर को मुख्यमंत्री द्वारा शुरू की गई योजना का जिले में अब तक क्या प्रगति है। इसकी पहली रिपोर्ट जिला प्रभारी मंत्री के हवाले से डीपीआरओ ब्रजेश विकल ने जानकारी दी है। योजना के तहत जिले में जल संरक्षण एवं पौधारोपण की एक वृहत कार्ययोजना बनाई गई है। जिले के सभी सात प्रखंडों के कुल 80 पंचायतों के अलावा नगर परिषद लखीसराय एवं नगर पंचायत बड़हिया में भी जल-जीवन-हरियाली योजना के तहत जल संचयन संरचनाओं के जीर्णोद्धार की कवायद जारी है। हालांकि सरकार के सख्त आदेश के बाद भी जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण अंचलों में सरकारी तालाब, पोखर एवं अन्य जल निकायों को अब तक जिला प्रशासन द्वारा अतिक्रमणमुक्त नहीं कराया गया है। खासकर नगर परिषद लखीसराय क्षेत्र अंतर्गत दो दर्जन सरकारी तालाब पर स्थानीय लोगों का कब्जा अब भी बरकरार है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा 14 लाख की लागत से शहर के पुरानी बाजार थाना चौक के नजदीक रजिस्ट्री कचहरी तालाब के उड़ाही कार्य का शुभारंभ किया गया है। लेकिन इस तालाब की उड़ाही से पहले ही गलत तरीके से प्राक्कलन बनाकर योजना की स्वीकृति कराने का मामला उजागर हुआ है। ऐसे में अब तक उड़ाही कार्य की सिर्फ कोरम पूरी की गई है। जल-जीवन-हरियाली योजना की प्रगति

जिले में कुल 4,783 सार्वजनिक जल संचयन संरचना है। जिसमें 501 पर अतिक्रमण है।

लघु जल संसाधन विभाग द्वारा 17 जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार कार्य किया जा रहा है।

ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 10 जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार किया जा रहा है।

जिले में कुल 436 आहर में 20 आहरों का जीर्णोद्धार किया जाना है जिसमें 05 आहरों का कार्य पूर्ण हो चुका है।

जिले में कुल 678 पईन में से 29 पईन का जीर्णोद्धार होना है। जिसमें 10 पईन का कार्य पूर्ण हो चुका है।

शहरी क्षेत्र में कुल 194 कुआं में 31 और ग्रामीण क्षेत्र में 1,504 कुआं में 14 कुआं का जीर्णोद्धार किया जा रहा है।

जिले में 210 हेक्टेयर क्षेत्र में दो लाख दस हजार पौधा लगाया जा रहा है। हर परिसर-हरा परिसर के तहत 1,190 बांस गैबियन पौधारोपण किया गया है।

जिले में कुल 2,06,212 एकड़ कृषि योग्य भूमि में 99 एकड़ भूमि पर जैविक खेती की जा रही है तथा 138 एकड़ भूमि पर टपकन सिचाई के माध्यम से खेती हो रही है।

भवन प्रमंडल द्वारा वर्षा जल संचय को लेकर 856 सरकारी भवनों पर जल संचयन संरचना का निर्माण कराया जा रहा है। अब तक 76 भवनों पर रेन वाटर हार्वेस्टिग का निर्माण कराया जा चुका है।

Posted By: Jagran

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