किसानों व पशुपालकों की बढ़ रही परेशानी

किऊल नदी का सिमट गया है दोनों किनारा संसू., सूर्यगढ़ा (लखीसराय) : गर्मी की आहट मात्र से जलस्तर गिरने लगा है। इसका असर नदी, तालाब पर भी पड़ने लगा है। प्रखंड की सबसे महत्वपूर्ण किऊल नदी पर भी इसका असर पड़ने लगा है। किऊल नदी सूख रही है। नदी का दोनों किनारा सिमट कर आपस में सटने के करीब पर आ गया है। इस नदी के प्रति लोगों की आस्था इतनी अधिक है कि लोग इसे गंगा के नाम से ही पुकराते हैं। बताया जाता है कि जहां अभी किऊल नदी बह रही है वहां 1911 तक गंगा का मुख्य धारा प्रवाहित होती थी। कटेहर गांव स्थित सिद्धपीठ गौरीशंकर धाम में श्मशान घाट हुआ करता था। आज यहां से नदी काफी दूर चली गई है। किऊल नदी किनारे बसे गांव के पशुपालक किसानों के लिए यह नदी जीवनदायिनी रही है। नदी के पानी से पशुपालन कार्य एवं सिचाई भी होती थी आज जल स्तर गिरने से पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है।

Posted By: Jagran

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