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लखीसराय में बाढ़ का पानी घटते ही नुकसान का आकलन शुरू, पीड़ितो के पुनर्वास की तैयारी तेज

Published: Tue, 15 Sep 2026 03:29 PM (IST)

लखीसराय जिले में बाढ़ का पानी घटने के साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन बहाल करने और नुकसान का आकलन करने की प्रशासनिक कवायद तेज हो गई है।

बाढ़ का पानी उतरा। फोटो जागरण

बाढ़ का पानी उतरा। फोटो जागरण

HighLights

  1. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन बहाल करने की कवायद तेज।

  2. मकान, फसल, पशुधन क्षति का सर्वेक्षण, सहायता वितरण होगा।

  3. सड़क, बिजली, स्वास्थ्य सेवाओं की बहाली पर विशेष जोर।

जागरण संवाददाता, लखीसराय। जिले में बाढ़ का पानी घटने के साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन बहाल करने और बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने की प्रशासनिक कवायद तेज हो गई है।

जिला प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित चार प्रखंडों बड़हिया, लखीसराय, पिपरिया एवं सूर्यगढ़ा तथा बड़हिया व सूर्यगढ़ा नगर परिषद क्षेत्रों में नुकसान का सर्वेक्षण, सहायता वितरण, क्षतिग्रस्त आधारभूत संरचनाओं के पुनर्स्थापन और भविष्य में बाढ़ से निपटने की तैयारी को लेकर विभागवार जिम्मेदारी तय की है।

प्रशासन के आदेश के अनुसार जिले में 2,24,389 की जनसंख्या बाढ़ से प्रभावित हुई है। बाढ़ का पानी कम होने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में जनजीवन बहाल करना अब प्राथमिकता होगी।

मकान, फसल और पशुधन क्षति का होगा सत्यापन

प्रशासन ने सभी अंचल अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित मकानों का सर्वेक्षण एवं क्षति का आकलन करने का निर्देश दिया है। मकानों की डिजिटल फोटोग्राफी कराई जाएगी और स्थानीय सत्यापन के बाद पात्र परिवारों को निर्धारित मानक के अनुसार गृह क्षति अनुदान उपलब्ध कराने की कार्रवाई होगी।

कृषि विभाग फसल क्षति का आकलन कर पात्र किसानों को कृषि इनपुट अनुदान उपलब्ध कराने के साथ जिन किसानों की खरीफ फसल नष्ट हुई है, उन्हें रबी फसल की बोआई के लिए आवश्यक सहायता दिलाएगा।

पशुपालन विभाग मृत अथवा क्षतिग्रस्त पशुधन का सर्वे करेगा तथा प्रभावित क्षेत्रों में उपचार, टीकाकरण और चारा की व्यवस्था सुनिश्चित करेगा। मछुआरों की क्षति का आकलन कर क्षतिग्रस्त नाव, जाल और अन्य उपकरणों के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार सहायता दी जाएगी।

सड़क-पुलिया से विद्यालय और बिजली तक बहाली की जिम्मेदारी तय

बाढ़ से क्षतिग्रस्त ग्रामीण सड़कों, पुल-पुलियों और संपर्क पथों का सर्वे कर तत्काल आवागमन बहाल करने का निर्देश दिया गया है। क्षतिग्रस्त सरकारी भवनों का आकलन कर शीघ्र पुनर्स्थापन अथवा पुनर्निर्माण किया जाएगा।

विद्यालय भवन, फर्नीचर, शैक्षणिक सामग्री एवं अन्य संसाधनों को हुए नुकसान का सर्वे कर पढ़ाई शुरू कराने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तथा क्षतिग्रस्त भवनों की मरम्मत या पुनर्निर्माण की कार्रवाई होगी।

स्वास्थ्य विभाग को महामारी, जल जनित एवं अन्य संक्रामक बीमारियों की रोकथाम, चिकित्सा दल और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है।

दूषित जलस्रोतों के उपचार, सुरक्षित पेयजल, क्षतिग्रस्त चापाकलों व जलापूर्ति योजनाओं की बहाली, जल जमाव वाले क्षेत्रों की सफाई और नालियों की सफाई भी प्राथमिकता में रखी गई है।

बाढ़ से क्षतिग्रस्त बिजली तार, पोल और अन्य विद्युत संरचनाओं का सर्वे कर सुरक्षा मानकों के अनुरूप आपूर्ति शीघ्र बहाल करने तथा दूरसंचार व्यवस्था को दुरुस्त करने का भी निर्देश दिया गया है।

बाढ़ नियंत्रण एवं जल निकासी से जुड़ी संवेदनशील संरचनाओं की क्षति का आकलन कर उनके संरक्षण और पुनर्स्थापन की योजना भी तैयार की जाएगी। जिला जनसंपर्क पदाधिकारी को राहत एवं पुनर्वास से जुड़ी सरकारी सहायता और योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है।

जिलाधिकारी ने सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर कार्यों की नियमित निगरानी और प्रगति की समीक्षा का निर्देश दिया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि पुनर्निर्माण का काम पहले से बेहतर और सुरक्षित निर्माण के सिद्धांत पर कराया जाएगा।

बाढ़ के दौरान किए गए कार्यों से मिली सीख के आधार पर भविष्य के लिए कार्ययोजना तैयार होगी तथा किसी भी स्तर पर शिथिलता, अनावश्यक विलंब अथवा निर्देशों के अनुपालन में कमी पाए जाने पर संबंधित पदाधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।

 

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