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अमेरिका में फंसा था बेटा तो आगे आई बेटी : RSS के लखीसराय जिला संघचालक सहदुल बाबू को पुत्री ज्योत्स्ना ने दी मुखाग्नि

Published: Fri, 28 Aug 2026 08:20 PM (IST)

लखीसराय के बड़हिया में RSS जिला संघचालक सहदुल बाबू का अंतिम संस्कार उनकी बेटी ज्योत्स्ना ने किया, क्योंकि बेटा अमेरिका ...और पढ़ें

आरएसएस के जिला संघचालक कृष्णा प्रसाद सिंह 'सहदुल बाबू' (73) का बड़हिया कॉलेज घाट पर राजकीय सम्मान व सामाजिक रीति से अंतिम संस्कार

आरएसएस के जिला संघचालक कृष्णा प्रसाद सिंह 'सहदुल बाबू' (73) का बड़हिया कॉलेज घाट पर राजकीय सम्मान व सामाजिक रीति से अंतिम संस्कार

HighLights

  1. लखीसराय के RSS जिला संघचालक सहदुल बाबू का निधन।

  2. बेटी ज्योत्स्ना ने पिता को मुखाग्नि देकर तोड़ी रूढ़ियां।

  3. बेटे के अमेरिका में होने से बेटी ने निभाया अंतिम कर्तव्य।

संवाद सूत्र, बड़हिया (लखीसराय)। लखीसराय जिले के बड़हिया स्थित कॉलेज घाट पर धनराज टोला निवासी एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के जिला संघचालक कृष्णा प्रसाद सिंह 'सहदुल बाबू' (73) का अंतिम संस्कार गुरुवार को पूरे सम्मान और आत्मीय माहौल में संपन्न हुआ। उनकी बड़ी पुत्री ज्योत्स्ना कुमारी ने सनातन परंपराओं के बीच आगे बढ़कर पिता की चिता को मुखाग्नि दी। बेटी द्वारा पिता को मुखाग्नि दिए जाने के इस भावुक दृश्य को देखकर श्मशान घाट पर मौजूद सैकड़ों लोगों की आंखें नम हो गईं।

सहदुल बाबू अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं, जिसमें उनका एक पुत्र अमरेश कुमार और दो पुत्रियां— ज्योत्स्ना एवं स्वयंप्रभा शामिल हैं। उनका पुत्र अमरेश अमेरिका में एक प्रतिष्ठित संस्थान में कार्यरत है, जबकि बड़ी पुत्री ज्योत्स्ना हैदराबाद में अपने बैंक अधिकारी पति के साथ रहती हैं।

पिता की बीमारी के दौरान दोनों पुत्रियों ने मायके में रहकर उनकी समर्पित भाव से सेवा की थी। ज्योत्स्ना कुछ दिन पूर्व ही एक काम के सिलसिले में केरल गई थीं, जहां पिता के निधन की सूचना मिलते ही वे तत्काल बड़हिया पहुंचीं। वहीं, अमेरिका की हालिया वीजा नीतियों में आए बदलावों और तकनीकी कारणों से पुत्र अमरेश समय पर भारत नहीं पहुंच सके।

बेटी के निर्णय ने रूढ़ियों को तोड़ समाज को दिया कड़ा संदेश

पुत्र के समय पर न पहुंच पाने के कारण समाज में तरह-तरह की बातें होने लगी थीं, लेकिन ज्योत्स्ना ने उन सभी चर्चाओं पर विराम लगाते हुए स्वयं पिता का अंतिम संस्कार करने का साहसिक निर्णय लिया। उन्होंने पूरे विधि-विधान और दृढ़ता के साथ अंतिम संस्कार की सभी रस्में पूरी कीं।

घाट पर मौजूद सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्धजनों ने ज्योत्स्ना के इस कदम की भूरि-भूरि प्रशंसा की। लोगों ने कहा कि माता-पिता के प्रति अंतिम कर्तव्य केवल बेटों तक सीमित नहीं है; बेटियां भी पूरे अधिकार, निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ इसे निभा सकती हैं।

क्षेत्र में शोक की लहर, स्वयंसेवकों ने दी श्रद्धांजलि

सहदुल बाबू अपने सादगीपूर्ण जीवन, सामाजिक सरोकारों और संघ के प्रति निष्ठावान समर्पण के लिए पूरे जिले में विशेष पहचान रखते थे। उनके निधन की खबर से बड़हिया सहित समूचे लखीसराय क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई। उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक, विभिन्न दलों के जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय ग्रामीण शामिल हुए तथा नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।