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लखीसराय अशोकधाम में भगदड़ के बाद भी नहीं डिगी आस्था; हादसे के बीच 2 लाख शिवभक्तों ने किया भोलेनाथ का जलाभिषेक

Published: Tue, 18 Aug 2026 11:29 AM (IST)

लखीसराय के अशोकधाम मंदिर में सावन की तीसरी सोमवारी पर भगदड़ में 7 महिलाओं की मौत और 27 घायल होने ...और पढ़ें

तीसरी सोमवारी पर सुबह मची भगदड़ में 7 महिला श्रद्धालुओं की मौत और 27 के घायल होने के बावजूद उमड़ा आस्था का सैलाब

तीसरी सोमवारी पर सुबह मची भगदड़ में 7 महिला श्रद्धालुओं की मौत और 27 के घायल होने के बावजूद उमड़ा आस्था का सैलाब

HighLights

  1. अशोकधाम में भगदड़ से 7 महिला श्रद्धालुओं की मौत।

  2. हादसे के बावजूद 2 लाख भक्तों ने किया जलाभिषेक।

  3. सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, वीआईपी एंट्री का आरोप।

संवाद सहयोगी, लखीसराय। पवित्र सावन मास की तीसरी सोमवारी पर पूरा लखीसराय जिला हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से गुंजायमान रहा। प्रसिद्ध श्री इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर (अशोकधाम) में सुबह के समय मची भीषण भगदड़ में 7 महिला श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत और 27 लोगों के घायल होने के बावजूद भक्तों की अगाध आस्था नहीं डिगी।

इस भारी दर्द और खौफ के बीच दिनभर में लगभग दो लाख श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना की। सुबह करीब 3:30 बजे जैसे ही मंदिर के गर्भगृह का मुख्य कपाट खुला, जलाभिषेक के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। विशेषकर महिला और युवा श्रद्धालुओं में सोमवारी व्रत को लेकर भारी उत्साह नजर आया।

हादसे के बाद कुछ देर पसरा सन्नाटा, फिर उमड़ी भक्तों की भीड़

सुबह भगदड़ की दुखद घटना के बाद कुछ समय के लिए मंदिर परिसर में अफरातफरी और भय का माहौल जरूर बन गया था, लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, श्रद्धालुओं के कदम मंदिर की ओर बढ़ते ही गए। हाथ में गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और फूल लिए भक्त घंटों कतार में खड़े रहे।

आम श्रद्धालुओं को दक्षिणी प्रवेश द्वार से करीब एक किलोमीटर तक पैदल चलाकर प्रशासन द्वारा तय किए गए प्रवेश बिंदु से मंदिर तक लाया गया। दोपहर बाद भीड़ नियंत्रित होने पर जिला प्रशासन ने शिवगंगा के रास्ते बनाए गए जिग-जैग बैरिकेडिंग से श्रद्धालुओं को गर्भगृह में सुगम प्रवेश देना शुरू किया।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, चहेतों को कराई गई VIP एंट्री

इतने बड़े हादसे के बाद भी मंदिर परिसर में सुरक्षा और प्रशासनिक प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए। स्थानीय श्रद्धालुओं का आरोप है कि पूर्वी गेट से आम जनता के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगाई गई थी, लेकिन मेला ड्यूटी में तैनात कुछ पुलिसकर्मियों और दंडाधिकारियों (मजिस्ट्रेट) ने नियमों को ताक पर रखकर अपने परिजनों और परिचितों को पिछले दरवाजे से 'वीआईपी एंट्री' दिलवाई। वहीं, आम श्रद्धालु भीषण गर्मी में लंबी दूरी पैदल तय कर कतार में लगकर दर्शन करते रहे।

एनएच-80 पर ट्रैफिक डायवर्जन, मीलों पैदल चले कांवड़िया

तीसरी सोमवारी को यातायात नियंत्रण के तहत प्रशासन ने राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-80) पर बालगुदर मोड़ और बीएड कॉलेज मोड़ से सभी वाहनों का परिचालन पूरी तरह बंद कर दिया था। इस कारण वृद्ध, महिलाएं और बच्चे मीलों पैदल यात्रा कर अशोकधाम धाम पहुंचे। हादसे के गहरे जख्म के बावजूद मंदिर परिसर से लेकर पूरे लखीसराय शहर में दिनभर आस्था का उल्लास भारी पड़ता दिखा।