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लखीसराय की शिक्षिका आकांक्षा को मिला बेस्ट टीचर का सम्मान, खेल-खेल में सिखाती हैं गणित-विज्ञान

Published: Mon, 26 Oct 2026 06:10 PM (IST)

लखीसराय की शिक्षिका आकांक्षा को उनके अनोखे शिक्षण तरीके के लिए जिला स्तरीय सर्वश्रेष्ठ शिक्षक सम्मान मिला है। वे प्रोजेक्ट-आधारित ...और पढ़ें

लखीसराय की शिक्षिका आकांक्षा को मिला सर्वश्रेष्ठ शिक्षक सम्मान, खेल-खेल में सिखाती हैं गणित-विज्ञान

लखीसराय की शिक्षिका आकांक्षा को मिला सर्वश्रेष्ठ शिक्षक सम्मान, खेल-खेल में सिखाती हैं गणित-विज्ञान

HighLights

  1. शिक्षिका आकांक्षा को जिला स्तरीय सर्वश्रेष्ठ शिक्षक सम्मान।

  2. प्रोजेक्ट-आधारित शिक्षा और मिट्टी के मॉडल का उपयोग।

  3. गणित-विज्ञान को बच्चों के लिए बनाया मजेदार।

डिजिटल डेस्क, लखीसराय/पटना। एक शिक्षक कुम्हार की तरह होता है, जो बच्चों के भविष्य को अपने हाथों से सही आकार देता है।

जब बात सरकारी स्कूलों की हो, तो वहां पढ़ने वाले बच्चों को अक्सर एक ऐसे मार्गदर्शक की जरूरत होती है, जो उन्हें सिर्फ किताबी ज्ञान न दे, बल्कि विषयों को उनके वास्तविक जीवन से जोड़कर समझाए।

इसी सोच को सच कर दिखाया है लखीसराय जिले के उत्क्रमित मध्य विद्यालय धनारी की शिक्षिका आकांक्षा ने।

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छठी से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को पढ़ाने वाली आकांक्षा को उनके इसी बेहतरीन और अनोखे शिक्षण तरीके के लिए ब्लॉक स्तर पर चुना गया और फिर उन्हें जिला स्तरीय सर्वश्रेष्ठ शिक्षक सम्मान से नवाजा गया है।

प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग और मिट्टी की आकृतियों से सुलझ रहे गणित के सवाल

आकांक्षा ने शिक्षा को चारदीवारी और रटने वाली उबाऊ प्रक्रिया से निकालकर प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग (PBL) से जोड़ दिया है। उनका मानना है कि पढ़ाई सिर्फ ब्लैकबोर्ड और कागजों तक सीमित नहीं होनी चाहिए।

विज्ञान में तो पहले से ही प्रोजेक्ट और प्रैक्टिकल होते रहे हैं, लेकिन आकांक्षा ने एक कदम आगे बढ़ते हुए अब गणित जैसे विषय को भी प्रोजेक्ट और एक्टिविटी के जरिए समझाना शुरू कर दिया है।

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वे बच्चों को गणित और विज्ञान जैसे मुश्किल लगने वाले विषयों को रटवाने के बजाय डायग्राम और मिट्टी की आकृतियों के जरिए बेहद आसान तरीके से समझाती हैं।

बच्चे जब खुद अपने हाथों से मिट्टी के मॉडल बनाकर क्षेत्रफल, आकार और विज्ञान के बुनियादी नियम सीखते हैं, तो उनके लिए पढ़ाई बोझ नहीं, बल्कि एक मजेदार अनुभव बन जाती है।

दीक्षा ऐप से लेकर एनजीओ तक ने की सराहना, जिले भर में मिसाल

आकांक्षा की मेहनत और उनके पढ़ाने का तरीका केवल उनके स्कूल तक सीमित नहीं रहा। अपने शिक्षण को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए उन्होंने अपने सभी शानदार प्रोजेक्ट्स और प्रेजेंटेशन को दीक्षा ऐप पर अपलोड करना शुरू कर दिया।

उनका यह प्रयास इतना सफल रहा कि शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले एक एनजीओ मंतरा फॉर चेंज ने खुद उनके विद्यालय का दौरा किया। टीम ने उनके पढ़ाने के इस इनोवेटिव तरीके को बेहद करीब से देखा और उसकी खूब सराहना की।

आज उनके इस बेहतरीन काम की चर्चा उनके पूरे ब्लॉक और क्लस्टर की सीमाओं से बाहर निकलकर पूरे जिले के विद्यालयों में हो रही है।

आकांक्षा की यह कहानी यह साबित करती है कि अगर एक सरकारी शिक्षक ठान ले, तो वह सीमित संसाधनों के बीच भी अपने बच्चों की तकदीर और विद्यालय की तस्वीर, दोनों बदल सकता है।