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किशनगंज में जीविका दीदियां बनाएंगी 10 लाख KG चायपत्ती, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा

Published: Wed, 01 Apr 2026 03:03 PM (IST)

जीविका दीदियों द्वारा संचालित महानंदा एफपीसी ने इस सीजन 10 लाख किलो चायपत्ती उत्पादन का लक्ष्य रखा है। किशनगंज के ...और पढ़ें

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संवाद सहयोगी, किशनगंज। महानंदा जीविका महिला एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड द्वारा संचालित टी प्रोसेसिंग एंड पैकेजिंग इकाई पोठिया में इस सीजन चायपत्ती उत्पादन का ट्रायल मंगलवार को किया गया। डीपीएम जीविका अनुराधा चंद्रा ने कहा कि महानंदा एफपीसी की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर ने इस सीजन दस लाख किलो चायपत्ती उत्पादन का लक्ष्य रखा है। जिसकी सारी तैयारी पूरी कर ली गई है।

डीपीएम ने बताया कि पिछले सीजन डेढ़ लाख किलो चायपत्ती तैयार की गई थी। एक लाख किलो से अधिक की चायपत्ती कि बिक्री हो चुकी है। उन्होंने कहा कि किसानों का चायपत्ता विभिन संग्रहण केंद्रों के माध्यम से 45 किसान संग्रहकों द्वारा टी फैक्ट्री में चाय पत्ता बेचा जा रहा है।

किसानों को सात दिनों के अंदर उनके बैंक खाते में चाय पत्ता की कीमत अंतरण कर दिए जाते हैं। महानंदा एफपीसी द्वारा अगस्त 2025 माह से दिसंबर 2025 माह तक 6,86,251 किलो चाय पत्ता खरीदा गया।

दूसरे सीजन में चायपत्ती उत्पादन के ट्रायल के अवसर पर बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की जीविका दीदियां नीलम, चांदनी, उमा रानी, ज्योतिका सिंह, प्रबंधक जीविका सतीश कुमार, महानंदा एफपीसी प्रभारी सीईओ राजदीप कुमार, कंसलटेंट राजन चौबे उपस्थित थे।

महानंदा एफपीसी के बोर्ड आफ डायरेक्टर की जीविका दीदियों द्वारा इस टी फैक्ट्री का संचालन किया जा रहा है। चायपत्ती उत्पादन और किसानों की आजीविका पर इसके प्रभाव को देखते हुए वर्ष 2002 में स्वर्णजयंती ग्राम स्वरोजगार योजना के तहत जिला ग्रामीण विकास अभिकरण किशनगंज को एक विशेष परियोजना स्वीकृत की गई।

महानंदा एफपीसी किशनगंज जिले के तीन प्रखंड पोठिया, ठाकुरगंज और किशनगंज सदर में कार्यरत हैं। वर्तमान में महानंदा एफपीसी में 737 शेयरधारक हैं। एफपीसी से जुड़ी सभी महिलाएं, जीविका स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं। ये सभी दीदियां चाय पत्ता की खेती और पत्ता तोड़ने के काम से जुड़ी हैं।

कंपनी का संचालन शेयरधारकों द्वारा चुने गए छह सदस्यीय निदेशक मंडल द्वारा किया जाता है। 25 अप्रैल 2025 को बिहार कैबिनेट ने टी प्रोसेसिंग एंड पैकेजिंग इकाई पोठिया को जीविका को सौंपने की सहमति दे दी। 27 अप्रैल 2025 को डीआरडीए किशनगंज के द्वारा फैक्ट्री को औपचारिक रूप से संचालन के लिए जीविका को सौंप दिया गया।