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रासायनिक खाद पर रोक, 500 हेक्टेयर में जैविक खेती! किशनगंज में 20-20 किसानों के समूह तैयार, मिलेगा भारी अनुदान

Published: Tue, 15 Sep 2026 11:37 PM (IST)

Kishanganj Organic Farming PKVY Scheme: किशनगंज में 500 हेक्टेयर भूमि पर 'परंपरागत कृषि विकास योजना' के तहत जैविक खेती को ...और पढ़ें

Kishanganj Organic Farming PKVY Scheme: किशनगंज में 500 हेक्टेयर में होगी जैविक खेती, रासायनिक खाद पर रोक; 20-20 किसानों के समूह गठित

Kishanganj Organic Farming PKVY Scheme: किशनगंज में 500 हेक्टेयर में होगी जैविक खेती, रासायनिक खाद पर रोक; 20-20 किसानों के समूह गठित

HighLights

  1. 500 हेक्टेयर में जैविक खेती को बढ़ावा देने की प्रशासनिक कवायद तेज।

  2. किसानों के 20-20 सदस्यों वाले समूह गठित, आर्थिक प्रोत्साहन मिलेगा।

  3. रासायनिक उर्वरकों पर प्रतिबंध, जैविक उत्पादों का प्रमाणीकरण और बाजार।

जागरण संवाददाता, किशनगंज। Kishanganj Organic Farming PKVY Scheme: जिले में किसानों को रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल से मुक्ति दिलाकर विषमुक्त जैविक खेती की ओर मोड़ने की प्रशासनिक कवायद तेज हो गई है। कृषि विभाग ने केंद्र प्रायोजित 'परंपरागत कृषि विकास योजना' (पीकेवीवाई) के तहत किशनगंज के 500 हेक्टेयर भू-भाग में बड़े पैमाने पर जैविक खेती कराने का खाका तैयार किया है।

इसके लिए जमीनी स्तर पर किसानों के क्लस्टर (समूह) गठित किए जा रहे हैं। योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसानों को केवल जैविक खेती अपनाने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन और तकनीकी इनपुट ही नहीं दिए जाएंगे, बल्कि उनके द्वारा उपजाए गए जैविक उत्पादों को उचित बाजार, ब्रांडिंग और पैकेजिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

योजना के पहले चरण में जिले की पांच चुनिंदा पंचायतों में किसान समूहों का गठन किया जा रहा है। व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक समूह में 20 किसानों को शामिल किया जा रहा है और अब तक ऐसे 20 समूहों का विधिवत गठन पूरा कर लिया गया है। नियमों के तहत समूह के स्तर पर कम से कम 20 हेक्टेयर का आपस में सटा हुआ (संलग्न) रकबा होना अनिवार्य किया गया है, ताकि पूरे क्लस्टर में जैविक मानकों का कड़ाई से पालन कराया जा सके।

2 हेक्टेयर तक मिलेगा अनुदान, रासायनिक खाद पर सख्त पाबंदी

कृषि विभाग द्वारा चयनित क्षेत्र में जैविक विधि से फसलों के उत्पादन की औपचारिक प्रक्रिया शीघ्र शुरू कराई जाएगी। इसके तहत पंजीकृत किसानों को जैविक खाद, केंचुआ खाद (वर्मी कम्पोस्ट) और जैविक कीटनाशकों की खरीद व निर्माण के लिए प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता दी जाएगी। योजना के प्रावधानों के मुताबिक, एक किसान को अधिकतम दो हेक्टेयर भूमि तक अनुदान का लाभ मिल सकेगा।

वहीं, चयनित जैविक क्लस्टर वाले पूरे क्षेत्र में रासायनिक उर्वरकों (यूरिया, डीएपी आदि) और जहरीले कीटनाशकों के सीधे इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। विभाग का तकनीकी अमला लगातार इन खेतों की निगरानी करेगा ताकि मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता को पुनर्जीवित किया जा सके।

प्रमाणीकरण के बाद बाजार में पहुंचेगा उत्पाद, बढ़ेगी आमदनी

उत्पादों की बिक्री और किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने की रणनीति पर जानकारी देते हुए जिला कृषि पदाधिकारी (डीएओ) प्रभात कुमार ने बताया कि चयनित किसान समूहों के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसके उपरांत क्षेत्रीय परिषद (रीजनल काउंसिल) के सहयोग से फसलों और मिट्टी के परीक्षण के बाद विधिवत 'जैविक उत्पाद प्रमाणीकरण' (Organic Certification) की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस प्रमाण-पत्र के मिलते ही किसानों के उत्पादों को बाजार में प्रीमियम जैविक उत्पाद के रूप में आधिकारिक पहचान मिल सकेगी।

डीएओ ने स्पष्ट किया कि विभाग का उद्देश्य सिर्फ रकबा बढ़ाना नहीं है, बल्कि किसानों की जेब में अतिरिक्त मुनाफा पहुंचाना है। इसके लिए उत्पादों की ग्रेडिंग, सुरक्षित पैकेजिंग और सीधे बड़े बाजारों व जैविक आउटलेट्स से जोड़ने की पारदर्शी व्यवस्था बनाई जा रही है। इससे रासायनिक खादों पर होने वाले भारी खर्च में कमी आएगी और किसानों को अपनी उपज का बाजार से बेहतर दाम मिल सकेगा।