जीविका दीदी नमिता का कमाल: किशनगंज में जनरल स्टोर चलाकर बेटी को बनाया टीचर, बेटा बना IT एग्जीक्यूटिव
पोठिया प्रखंड की जीविका दीदी नमिता दास ने स्वयं सहायता समूह से ऋण लेकर एक छोटी दुकान शुरू की, जिसकी कमाई से उन्होंने अपने बच्चों को शिक्षित किया।

जीविका दीदी नमिता दास। (जागरण)
HighLights
नमिता दास ने जीविका ऋण से छोटी दुकान शुरू कर परिवार संवारा।
दुकान की कमाई से बच्चों को शिक्षित कर भविष्य उज्ज्वल किया।
बेटी शिक्षिका बनी, बेटा जीविका में आईटी एक्जीक्यूटिव बना।
जागरण संवाददाता, किशनगंज। इच्छाशक्ति मजबूत हो और मेहनत करने का जज्बा हो तो सीमित संसाधनों में भी सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है।
पोठिया प्रखंड की जीविका दीदी नमिता दास ने इसे सच कर दिखाया है। स्वयं सहायता समूह से ऋण लेकर शुरू किए गए छोटे-से जनरल स्टोर की कमाई से उन्होंने न केवल अपने परिवार को आर्थिक मजबूती दी, बल्कि बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य को भी संवारा।
आज उनकी बेटी शिक्षिका बन चुकी है, जबकि बेटे का चयन परीक्षा के माध्यम से आईटी एक्जीक्यूटिव के पद पर हुआ है।
नमिता दास की सफलता की कहानी महिला सशक्तीकरण, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की मिसाल है।
जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने ऋण लेकर अपनी दुकान शुरू की। इस छोटे-से व्यवसाय से होने वाली आमदनी ने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।
उन्होंने अपनी कमाई का उपयोग बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में किया और उन्हें बेहतर भविष्य देने के लिए लगातार मेहनत करती रहीं।
नमिता दास के लिए दुकान चलाना केवल आमदनी का जरिया नहीं था, बल्कि बच्चों के सपनों को पूरा करने का माध्यम भी था।
सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने बच्चों की शिक्षा से समझौता नहीं किया। उनकी मेहनत रंग लाई और आज बेटी शिक्षिका बनकर अपने पैरों पर खड़ी है।
बेटा बना आईटी एक्जीक्यूटिव
वहीं, बेटे का चयन भी परीक्षा के माध्यम से जीविका में ब्लॉक आईटी एक्जीक्यूटिव के पद पर हुआ है। बच्चों की सफलता ने नमिता के संघर्ष को सार्थक कर दिया।
नमिता दास का कहना है कि जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ने और ऋण मिलने से उन्हें स्वरोजगार शुरू करने का अवसर मिला।
दुकान से होने वाली आमदनी ने परिवार को संबल दिया। इसी के सहारे उन्होंने बच्चों को शिक्षित किया और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का सपना पूरा किया।
उनकी कहानी बताती है कि स्वयं सहायता समूह महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं देते, बल्कि उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने और परिवार की स्थिति बदलने का अवसर भी प्रदान करते हैं।
नमिता दास आज उन महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना कर रही हैं।
यह भी पढ़ें- 10 हजार के कर्ज से बदली किस्मत, किशनगंज की प्रतिमा दीदी गोलगप्पे-चाट बेचकर हर महीने कमा रहीं 15 हजार रुपये
