किशनगंज के पूर्व सिविल सर्जन की पेंशन से 3 साल तक कटेगा 5 प्रतिशत हिस्सा, लापरवाही पर गिरा गाज
किशनगंज के पूर्व सिविल सर्जन डॉ. कौशल किशोर प्रसाद की पेंशन में तीन साल तक पांच प्रतिशत की कटौती होगी।
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एआई द्वारा जेनरेट इमेज।
HighLights
पूर्व सिविल सर्जन डॉ. प्रसाद की पेंशन में कटौती।
तीन साल तक पांच प्रतिशत पेंशन राशि कटेगी।
कर्तव्य में शिथिलता बरतने के आरोप प्रमाणित हुए।
संवाद सहयोगी, किशनगंज। किशनगंज के तत्कालीन सिविल सर्जन एवं अब सेवानिवृत्त डॉ. कौशल किशोर प्रसाद की पेंशन में अब तीन वर्षों तक पांच प्रतिशत की कटौती होगी।
सिविल सर्जन के पद पर कार्यरत रहने के दौरान कार्य के निर्वहन में शिथिलता बरतने और दायित्वों के निर्वहन में अभिरुचि नहीं लेने के आरोपों की विभागीय जांच में पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने यह कार्रवाई की है।
बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम 43(ख) के तहत की गई इस कार्रवाई का पत्र स्वास्थ्य विभाग के अपर सचिव ने राज्यपाल के आदेश से संबंधित अधिसूचना जारी की है।
अधिसूचना के मुताबिक डॉ. प्रसाद के विरुद्ध विभागीय ज्ञापन के माध्यम से आरोप-पत्र गठित किया गया था। इसमें उनसे आरोपों के संबंध में लिखित बचाव प्रस्तुत करने को कहा गया।
उनकी ओर से प्रस्तुत लिखित अभिकथन की विभागीय स्तर पर समीक्षा की गई, लेकिन उसे युक्तिसंगत नहीं पाया गया। इसके बाद उनके विरुद्ध बिहार पेंशन नियमावली के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।
जांच के दौरान उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों की समीक्षा की गई। जिसमें दायित्वों के प्रति उदासीनता और लापरवाही के आरोपों को प्रमाणित माना। इसके बाद उनके लिखित अभ्यावेदन पर भी विचार किया गया, लेकिन विभाग को कार्रवाई वापस लेने का पर्याप्त आधार नहीं मिला।
डॉ. प्रसाद के विरुद्ध प्रस्तावित कार्रवाई के संबंध में बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से भी सहमति प्राप्त की गई। आयोग की सहमति और सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन के बाद विभाग ने पेंशन में कटौती का अंतिम आदेश जारी किया।
आदेश के तहत डॉ. कौशल किशोर प्रसाद की पेंशन की राशि में पांच प्रतिशत की कटौती तीन वर्ष तक की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने अधिसूचना की प्रतियां संबंधित अधिकारियों को भेजते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
किशनगंज में सिविल सर्जन रहते कार्यकाल से जुड़ा मामला
डॉ. कौशल किशोर प्रसाद के विरुद्ध यह कार्रवाई किशनगंज में सिविल सर्जन के पद पर उनके कार्यकाल से जुड़े आरोपों के आधार पर हुई है।
सेवानिवृत्ति के बाद भी विभागीय जांच की प्रक्रिया जारी रही और आरोप प्रमाणित होने के बाद पेंशन पर आर्थिक दंड लगाया गया।
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