किशनगंज। लोकतांत्रिक व्यवस्था कभी-कभी जनप्रतिनिधियों के कारनामों के कारण माखौल बन कर रह जाता है। बहादुरगंज नगर पंचायत में गुरुवार को ऐसा ही वाकया देखने को मिला। मुख्य पार्षद सुमित्रा देवी के खिलाफ 16 जुलाई को लगाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर आयोजित बैठक में एक भी पार्षद शामिल नहीं हुए। शांतिपूर्ण तरीके से बैठक आयोजित करने के लिए प्रशासनिक तैयारी पूरी थी। अधिकारी इंतजार करते रहे लेकिन 18 पार्षदों में जिन 13 पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए थे वह भी नजर नहीं आए और अविश्वास प्रस्ताव खारिज हो गया। कार्यपालक पदाधिकारी राम विलास दास ने कोरम के अभाव में बैठक निरस्त करते हुए सुमित्रा देवी को मुख्य पार्षद के पद पर बने रहने की मुहर लगा दी।

बताते चलें कि बहादुरगंज नगर पंचायत के मुख्य पार्षद के मनमानी व विकास के अवरूद्ध के नाम पर हर बार अविश्वास प्रस्ताव तो लाया जाता है। लेकिन बीते चार वर्षों में यह अविश्वास प्रस्ताव कभी सफल नहीं हो पाया है। यह राजनीति भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि अविश्वास प्रस्ताव के बैठक से पहले तक पार्षद मुख्य पार्षद के कामकाज का विरोध कर अविश्वास प्रस्ताव लाते हैं लेकिन उसी प्रस्ताव को वहीं पार्षद पूरा करने से पीछे हट जाते हैं। मुख्य पार्षद के खिलाफ 16 जुलाई को 18 में से तेरह नगर पार्षद ने अविश्वास प्रस्ताव लगाया था। इसमें मुख्य रूप से उप मुख्य पार्षद मु. सफरूल, राजीव कुमार सिन्हा, पूनम सिन्हा, दीपक कुमार, सुनीता देवी, सईदुर रहमान, मु. फैयाज आलम, कमरून निशा, रासमनी देवी, रफत नाज, मु. शाकीर, संजय भारती सहित अन्य पार्षद का नाम शामिल था। इन पार्षदों ने मुख्य पार्षद पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। मुख्य पार्षद सुमित्रा देवी के द्वारा मासिक बैठक नहीं बुलाने, नगर पार्षदों के शिकायतों की अनदेखी करने, सशक्त स्थायी समिति के अध्यक्ष होने के बावजूद कार्य संचालन एवं अन्य दायित्व निर्वहन करने में असफल सहित अन्य आरोप लगाते हुए अविश्वास प्रस्ताव को लेकर बैठक बुलाने की मांग की गयी थी।

नगर पंचायत प्रशासन की ओर से शांतिपूर्ण बैठक को लेकर प्रशासनिक तैयारी पूरी थी। इसके लिए राज कुमार प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी बहादुरगंज को दंडाधिकारी एवं एएसआई अशोक चौधरी के नेतृत्व में बहादुरगंज थाना की ओर से पुलिस जवान को तैनात किया गया था। सभागार भवन में कार्यपालक पदाधिकारी राम विलास दास एवं कार्यालय कर्मी नियत समय से पहले से ही उपस्थित थे। पूर्व निर्धारित समय 11 बजे होने वाली बैठक में 12 बजे तक कोई भी नगर पार्षद बैठक स्थल पर नहीं पहुंचे। सभी तैयारी ऐसे ही रह गई और बैठक नहीं होने के कारण नियमानुसार अविश्वास प्रस्ताव को निरस्त कर दिया।

कोट के लिए:- नगर के किसी पार्षद का उनके प्रति असंतोष नहीं है। सभी पार्षद मेरे साथ हैं और मिलजुलकर काम किया जाएगा। सुमित्रा देवी, मुख्य पार्षद

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