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मलेशिया के जंगलों में छिपने को मजबूर बिहार के युवा! न वीजा है और न खाना, वायरल वीडियो देख परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

Published: Fri, 11 Sep 2026 06:15 PM (IST)

Kishanganj Purnia Youths Stranded In Malaysia Jungle: मलेशिया में बेहतर भविष्य की तलाश में गए बिहार के किशनगंज और पूर्णिया ...और पढ़ें

HighLights

  1. बिहार के युवा मलेशिया में एजेंटों के धोखे का शिकार।

  2. जंगलों में छिपकर दिन काट रहे, खाने-पीने की समस्या।

  3. परिजनों ने भारत सरकार से वतन वापसी की अपील की।

जागरण संवाददाता, किशनगंज। Kishanganj Purnia Youths Stranded In Malaysia Jungle: सात समंदर पार बेहतर भविष्य और रोजी-रोटी का सपना संजोकर मलेशिया गए सीमांचल (किशनगंज और पूर्णिया) के दर्जनों युवाओं की जिंदगी एजेंटों के फरेब के चलते बदहाली के दलदल में फंस गई है। विदेशी धरती पर न तो काम मिला और न ही वैध कागजात; उल्टे इमिग्रेशन और पुलिस की धरपकड़ से बचने के लिए ये नौजवान मलेशिया के घने जंगलों में भूखे-प्यासे छिपकर दिन-रात काटने को मजबूर हैं।

इंटरनेट मीडिया पर सामने आए एक मार्मिक वीडियो में बीहड़ जंगलों के बीच जमीन पर बैठे इन युवकों ने अपनी लाचारी बयां करते हुए भारत सरकार से वतन वापसी की गुहार लगाई है, जिसे देख वतन में बैठे परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

ताजा मामला किशनगंज जिले के कोचाधामन प्रखंड स्थित कजलामनी गांव से जुड़ा है। यहां के चार युवकों के मलेशिया में भयावह हालातों के बीच फंसे होने की पुष्टि हुई है। परिजनों के अनुसार, इनमें बड़ा तनवीर आलम और ओवैद आलम को मलेशियाई इमिग्रेशन और पुलिस ने अवैध प्रवास के आरोप में पकड़कर जेल भेज दिया है। वहीं छोटा तनवीर आलम और रूखसेद गिरफ्तारी के खौफ से अन्य साथियों के साथ जंगल में छिपकर किसी तरह अपनी जान बचा रहे हैं।

प्रति युवक दो-दो लाख की ठगी, जमीन बेचकर दिया था पैसा

पीड़ित परिजनों का गंभीर आरोप है कि एजेंट नाहिद गनी ने प्रत्येक युवक से दो-दो लाख रुपये, यानी कुल आठ लाख रुपये ऐंठकर उन्हें गैरकानूनी तरीके से मलेशिया भेजा था। एजेंट ने वहां पहुंचते ही मोटी तनख्वाह और सुरक्षित काम का झांसा दिया था। गरीब परिवारों ने अपनी बरसों की जमा-पूंजी लगाने के साथ-साथ ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज लेकर और जमीन गिरवी रखकर एजेंट की मांग पूरी की थी।

  • रोजगार की तलाश में मलेशिया गए किशनगंज और पूर्णिया के दर्जनों युवा जंगलों में छिपकर रहने को विवश, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

  • किशनगंज के कोचाधामन अंतर्गत कजलामनी गांव के दो युवक जेल में बंद, गिरफ्तारी से बचने के लिए कई युवा जंगलों में काट रहे दिन-रात

  • एजेंट नाहिद गनी पर प्रत्येक युवक से दो-दो लाख (कुल आठ लाख) रुपये लेकर अवैध तरीके से विदेश भेजने और धोखाधड़ी करने का आरोप

  • पूर्व विधायक मुजाहिद आलम ने पीड़ित परिजनों से की मुलाकात, सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद आजाद ने एसपी से मिलकर फर्जी एजेंटों पर कार्रवाई की मांग की

मलेशिया की सरजमीं पर कदम रखते ही युवाओं के सामने न केवल काम बल्कि दो वक्त की रोटी और छत का भी संकट खड़ा हो गया। युवकों ने फोन पर स्वजनों को रोते हुए बताया कि उनके पास न तो वीजा है, न काम और न ही पेट भरने के लिए पैसे बचे हैं। जंगल में रहने के कारण कई युवक गंभीर रूप से बीमार और चोटिल हो चुके हैं, लेकिन पकड़े जाने और जेल जाने के डर से वे अस्पताल तक जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।

40 युवकों की गिरफ्तारी का दावा, सांसद व पूर्व विधायक ने लिया संज्ञान

इससे पहले भी सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था, जिसमें किशनगंज व पूर्णिया के करीब 40 युवकों को मलेशियाई पुलिस द्वारा हथकड़ी लगाकर ले जाते दिखाया गया था। लगातार सामने आ रहे ऐसे वीडियो से पूरे इलाके में गहरा आक्रोश और बेचैनी है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए कोचाधामन के पूर्व विधायक मुजाहिद आलम ने कजलामनी गांव पहुंचकर पीड़ित परिजनों से मुलाकात की और हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। इस दौरान मुखिया अबु नसर, सरपंच दिलीप यादव और जाहिद हुसैन सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।

वहीं, किशनगंज के सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद आजाद ने गुरुवार को पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार से मुलाकात कर विदेश भेजने के नाम पर संगठित सिंडिकेट चलाने वाले एजेंटों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की। सांसद ने कहा कि युवाओं की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले बिचौलियों को तुरंत सलाखों के पीछे भेजा जाए।

केंद्र सरकार और भारतीय दूतावास से हस्तक्षेप की गुहार

बेबस परिजनों ने भारत सरकार, विदेश मंत्रालय और कुआलालंपुर स्थित भारतीय उच्चायोग (Indian High Commission) से अविलंब हस्तक्षेप करने की मार्मिक अपील की है। परिजनों ने मांग की है कि मलेशिया में फंसे सभी भारतीय युवाओं का तुरंत पता लगाया जाए, जंगलों में छिपे लाचार युवकों तक सुरक्षित आश्रय, भोजन व चिकित्सा सुविधा पहुंचाई जाए और जिनके पास कागजात नहीं हैं, उन्हें आपातकालीन यात्रा दस्तावेज (Emergency Certificate) जारी कर सकुशल वतन वापस लाया जाए।