खगड़िया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यक्रम के तहत कार्यरत कर्मियों की मांगों पर विचार करते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया है। हड़ताल पर गए संविदा कर्मियों के लिए स्वास्थ्य विभाग ने राहत प्रदान करते हुए ऐसे कर्मी जो तीन साल या इससे अधिक समय से कार्यरत हैं उन्हें 10 प्रतिशत मानदेय वृद्धि तथा जो पांच वर्ष या इससे अधिक समय से कार्यरत हैं उन्हें 15 प्रतिशत मानदेय वृद्धि देने की घोषणा की है।

सिविल सर्जन अरुण कुमार ¨सह ने बताया कि एमबीबीएस चिकित्सकों को जिन्हें 41 हजार रुपये प्रति माह दिए जाते थे उन्हें अब 50 हजार रुपये मानदेय के रूप में दिए जाएंगे। विदित हो कि स्वास्थ्य विभाग में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यक्रम के तहत खगड़िया में कार्यरत कर्मी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। इधर, डीपीआरओ कमल ¨सह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के द्वारा जानकारी दी गई है कि उपरोक्त प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। सरकार की सम्पुष्टि के साथ ही कर्मियों को लाभ मिलने लगेगा। सिविल सर्जन डॉ. अरुण कुमार ¨सह के हवाले से डीपीआरओ ने बताया कि सभी कर्मियों को अमूमन 15 से 20 प्रतिशत तक लाभ होगा। उन्होंने बताया कि प्रधान सचिव के द्वारा अपील की गई है कि सभी संविदा कर्मी जनहित में अपनी हड़ताल वापस ले लें। कहा गया है कि अगर शनिवार तक काम पर नहीं लौटते हैं या स्वेच्छा से हड़ताल जारी रखते हैं तो ऐसे कर्मी पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। सिविल सर्जन द्वारा बताया गया कि स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत डाटा ऑपरेटर बेवजह हड़ताल पर हैं, क्योंकि उनकी बहाली राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यक्रम के अंतर्गत नहीं है।

Posted By: Jagran