खगड़िया: कोसी के उफान से डूबी सोनमनकी-आनंदपुर मारण सड़क; फरकिया का टूटा संपर्क, नाव और चचरी पुल ही बना सहारा
कोसी नदी में जलस्तर बढ़ने से खगड़िया के अलौली प्रखंड में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है, जिससे सोनमनकी-आनंदपुर ...और पढ़ें

अलौली प्रखंड अंतर्गत झीमा के समीप सड़क पर चढ़ा 3 से 4 फीट पानी; सैकड़ों एकड़ में लगी धान की फसल हुई जलमग्न
HighLights
कोसी नदी खतरे के निशान से ऊपर, खगड़िया में बाढ़ गंभीर।
सोनमनकी-आनंदपुर मारण सड़क जलमग्न, हजारों गांवों का संपर्क टूटा।
ग्रामीण नाव व चचरी पुल से आवागमन, फसलें भी बर्बाद।
जागरण संवाददाता, खगड़िया। कोसी नदी में लगातार हो रहे जलस्तर के उतार-चढ़ाव के बीच नदी अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। नदी के उफान पर होने के कारण खगड़िया जिले के अलौली प्रखंड स्थित फरकिया इलाके में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। झीमा के निकट ग्रामीण सड़क पर बाढ़ का पानी बहने से खगड़िया और सहरसा जिले के दर्जनों गांवों के हजारों लोगों का जिला मुख्यालय से सीधा सड़क संपर्क पूरी तरह टूट चुका है।
ग्रामीण कार्य विभाग (RWD) के अधीन खगड़िया जिला मुख्यालय को फरकिया के रास्ते सहरसा से जोड़ने वाली 'सोनमनकी-आनंदपुर मारण पथ' पर झीमा के पास पानी का तेज बहाव हो रहा है। सड़क जलमग्न होने से झीमा के उत्तरी हिस्से के हजारों ग्रामीणों के आवागमन का एकमात्र सहारा अब नाव ही रह गया है।
पिछले 10 दिनों से ठप है आवागमन, फसलें भी डूबीं
झीमा निवासी ग्रामीण चंचल चौधरी और रामप्रवेश चौधरी ने बताया कि जिले के सर्वजीता, अमौसी, भिरखी, खजूर बन्ना, सोहरवा, बेलाही, बरियाही और शिशबन्नी के साथ-साथ सहरसा जिले के सलखुआ प्रखंड अंतर्गत अलानी आदि गांवों के हजारों लोग इसी मुख्य मार्ग से रोजाना खगड़िया आते-जाते हैं। सड़क डूब जाने से बीते 10 दिनों से लोगों की दिनचर्या पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई है।
वहीं स्थानीय ग्रामीण मोहन शर्मा ने बताया कि आनंदपुर-मारण इलाके के सैकड़ों एकड़ भूभाग में बाढ़ का पानी फैल चुका है, जिससे किसानों की धान की फसलें डूबकर बर्बाद हो गई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पहले बाढ़ के पानी की निकासी का प्राकृतिक रास्ता था, लेकिन कुछ निजी लोगों द्वारा जल निकासी अवरुद्ध कर दिए जाने से बीते चार वर्षों से हर बरसात में यह सड़क 3 महीने तक पानी में डूबी रहती है।
डेढ़ दर्जन नावों का हो रहा परिचालन, ग्रामीण बना रहे चचरी पुल
सड़क संपर्क भंग होने के कारण वर्तमान में डेढ़ दर्जन से अधिक निजी नावों का परिचालन हो रहा है। ग्रामीण अपनी मोटरसाइकिल और साइकिल को नाव पर लादकर जान जोखिम में डालकर पानी के आर-पार जाने को मजबूर हैं।
यातायात की भीषण किल्लत को देखते हुए स्थानीय ग्रामीण रामप्रवेश चौधरी व अन्य लोगों ने मिलकर बांस का चचरी पुल बनाना शुरू किया है, ताकि पैदल यात्रियों और जरूरी कार्यों के लिए आवागमन को सुगम बनाया जा सके।
सड़क पर रेनकट और धसान, बढ़ाई जाएगी सरकारी नाव: सीओ
सोनमनकी-आनंदपुर मारण सड़क पर झीमा के पास पानी के तेज कटाव के कारण रेनकट और धसान की समस्या विकराल हो चुकी है, जिससे बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी सड़क आवागमन योग्य नहीं रह सकेगी।
अलौली के अंचल अधिकारी (सीओ) ने बताया कि सड़क की अविलंब मरम्मत और मजबूतीकरण के लिए ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता को कई बार पत्राचार के माध्यम से सूचित किया जा चुका है। अंचल प्रशासन की ओर से फिलहाल एक सरकारी नाव का परिचालन कराया जा रहा है और ग्रामीणों की सुविधा के लिए जल्द ही सरकारी नावों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
