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Khagaria Flood : 'बाढ़ है तो क्या, पढ़ाई जरूरी है!' 15 दिनों से डूबा है गांव; नाव पर सवार होकर स्कूल जा रहे नौनिहाल

Published: Fri, 04 Sep 2026 02:35 PM (IST)

Khagaria Flood :खगड़िया के परबत्ता में बाढ़ से घिरे शर्मा टोला के बच्चे 15 दिनों से जलमग्न होने के बावजूद ...और पढ़ें

Khagaria Flood : परबत्ता के शर्मा टोला में बाढ़ पर भारी पढ़ाई का जज्बा, नाव से गंगा पार कर स्कूल जा रहे 25 बच्चे

Khagaria Flood : परबत्ता के शर्मा टोला में बाढ़ पर भारी पढ़ाई का जज्बा, नाव से गंगा पार कर स्कूल जा रहे 25 बच्चे

HighLights

  1. खगड़िया का शर्मा टोला 15 दिनों से बाढ़ से घिरा।

  2. बच्चे जान जोखिम में डालकर नाव से स्कूल जा रहे।

  3. बीईओ ने बाढ़ समाप्ति पर विशेष कक्षाएं लगाने को कहा।

संवाद सूत्र, परबत्ता (खगड़िया)। Khagaria Flood :गंगा नदी के उफान और जलप्रलय के बीच भी अगर हौसले बुलंद हों तो कुदरत की बंदिशें छोटी पड़ जाती हैं। इसका जीवंत उदाहरण खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड अंतर्गत तेमथा करारी पंचायत का शर्मा टोला पेश कर रहा है। करीब 100 घरों वाला यह टोला पिछले 15 दिनों से गंगा के बाढ़ के पानी से पूरी तरह जलमग्न है। चारों तरफ पानी का पहरा है, लेकिन इन विषम परिस्थितियों में भी बच्चों के भीतर शिक्षा की अलख मंद नहीं पड़ी है। बाढ़ की विभीषिका पर नौनिहालों की पढ़ाई की ललक भारी पड़ रही है।

  • खगड़िया के परबत्ता प्रखंड अंतर्गत तेमथा करारी पंचायत का शर्मा टोला 15 दिनों से बाढ़ के पानी से घिरा

  • गांव में 5वीं तक ही स्कूल होने के कारण रोज 25 बच्चे नाव से आधा किमी पानी पार कर जाते हैं मिडिल व हाई स्कूल

  • 'गंगा मैया की जय' बोलकर बैठते हैं बच्चे; प्रशासन ने चलाई दो सरकारी नावें, प्रशिक्षित नाविक तैनात

  • प्रभारी बीईओ रजनीश कुमार का बयान: पानी से घिरे गांवों के बच्चों को स्कूल न आने का निर्देश, बाद में पूरी होगी छूटी पढ़ाई

शर्मा टोला स्थित प्राथमिक विद्यालय में केवल पांचवीं कक्षा तक की ही पढ़ाई की सुविधा है। ऐसे में आगे की शिक्षा जारी रखने के लिए गांव के करीब 25 छात्र-छात्राओं को रोज एक से तीन किलोमीटर दूर स्थित मध्य एवं उच्च विद्यालयों का रुख करना पड़ता है। ये बच्चे जान जोखिम में डालकर पहले प्रशासन की नाव से करीब आधा किलोमीटर का जलमग्न इलाका पार कर जीएन बांध पहुंचते हैं। बांध पर उतरने के बाद वे पैदल अथवा ई-रिक्शा पकड़कर अपने-अपने विद्यालयों तक का सफर तय करते हैं।

'बाढ़ के डर से घर कैसे बैठें', बच्चों का अटूट हौसला

मध्य विद्यालय तेमथा में सातवीं कक्षा की छात्रा निधि कुमारी के चेहरे पर बाढ़ का कोई खौफ नहीं दिखता। वह बेबाकी से कहती है— "बाढ़ है तो क्या हुआ, पढ़ाई जरूरी है। हम बाढ़ के डर से हाथ पर हाथ धरकर घर कैसे बैठ जाएं।" वहीं, बेटी के इस जज्बे पर गर्व करने के साथ-साथ पिता विवेक शर्मा की चिंता भी लाजिमी है। वे कहते हैं कि जब तक बेटी स्कूल से सुरक्षित घर नहीं लौट आती, तब तक दिल में धुकधुकी और बेचैनी बनी रहती है।

रमावती उच्च विद्यालय तेमथा के नौवीं कक्षा के छात्र सत्यम के पिता खाखो शर्मा का भी यही दर्द है। वे बताते हैं कि बच्चे नाव के सहारे ही स्कूल जाते हैं और उसी से लौटते हैं। डर जरूर लगता है, लेकिन बच्चों के भविष्य के आगे मजबूरी है। वहीं मध्य विद्यालय जानकीचक के सातवीं के छात्र रमनीष कुमार मासूमियत भरे आत्मविश्वास से कहते हैं— "हम 'गंगा मैया की जय' बोलकर नाव पर सवार होते हैं और मैया पार लगा देती हैं, हमें बिल्कुल डर नहीं लगता।"

टोले में चल रहीं दो नावें, आपदा मित्र कर रहे जागरूक

स्थानीय आपदा मित्र ऋषि कुमार ने बताया कि परबत्ता अंचल प्रशासन की तरफ से शर्मा टोला के लिए दो सरकारी नावें संचालित की जा रही हैं। बाढ़ के दौरान सुरक्षा व बचाव को लेकर ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। गांव-घर में जाकर और बाकायदा संध्या चौपाल लगाकर लोगों को सतर्क रहने के तरीके बताए गए हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ कितनी भी विकराल हो, पर बच्चों की पढ़ाई की ललक के आगे सब बेअसर है। नावों पर प्रशिक्षित नाविक तैनात हैं और क्षमता से अधिक सवारी नहीं बैठाने की सख्त हिदायत दी गई है।

बीईओ बोले- जान जोखिम में न डालें, बाद में पूरी कराएंगे पढ़ाई

इधर, मामले के संज्ञान में आने के बाद शिक्षा विभाग ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर कदम उठाए हैं। परबत्ता के प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) रजनीश कुमार ने बताया कि संबंधित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को स्पष्ट निर्देश दिए जा रहे हैं। जिन गांवों में बाढ़ का पानी फैला है और जहां से बच्चों को नाव के सहारे स्कूल आना पड़ता है, वहां के छात्र-छात्राओं को फिलहाल स्कूल आने से मना किया जाए। बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। बाढ़ समाप्त होने के बाद विशेष कक्षाएं लगाकर उनकी छूटी हुई पढ़ाई की भरपाई करा दी जाएगी।