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उद्घाटन से पहले ही अस्पताल भवन में दरारें! खगड़िया के डुमरिया बुजुर्ग में डॉक्टर सहमे, निर्माण पर उठे सवाल

Published: Wed, 07 Oct 2026 07:35 PM (IST)

खगड़िया के डुमरिया बुजुर्ग में नवनिर्मित अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन उद्घाटन से पहले ही जर्जर हो गया है, ...और पढ़ें

खगड़िया के परबत्ता स्थित डुमरिया बुजुर्ग APHC के नए भवन की दीवारों पर स्पष्ट दिखतीं गहरी दरारें

खगड़िया के परबत्ता स्थित डुमरिया बुजुर्ग APHC के नए भवन की दीवारों पर स्पष्ट दिखतीं गहरी दरारें

HighLights

  1. नवनिर्मित अस्पताल भवन में उद्घाटन से पहले ही दरारें पड़ गईं।

  2. चिकित्सक ने असुरक्षित भवन में शिफ्ट होने से साफ इनकार किया।

  3. विधायक ने निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच की मांग की।

संवाद सूत्र, परबत्ता (खगड़िया)। बिहार सरकार एक ओर जहां ग्रामीण इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर नए अस्पताल भवनों का निर्माण करा रही है, वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण ये निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही सफेद हाथी साबित हो रहे हैं।

खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड अंतर्गत सियादतपुर अगुवानी पंचायत के डुमरिया बुजुर्ग स्थिति अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (APHC) का नवनिर्मित भवन इसका ताजा उदाहरण है। वर्षों पूर्व बनकर तैयार हुए इस भवन में अस्पताल शिफ्ट करने की प्रशासनिक तैयारी चल ही रही थी

कि उद्घाटन से पहले ही इमारत के कई हिस्सों और दीवारों पर गहरी दरारें नजर आने लगीं। भवन की इस बदहाली ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सरकारी राशि के दुरुपयोग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

डॉक्टर ने जताया जान-माल का खतरा, मरम्मत और रंगाई-पुताई कर खानापूर्ति की कोशिश

मामले का खुलासा तब हुआ जब स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पताल को नए भवन में स्थानांतरित करने का मौखिक निर्देश दिया गया। प्रतिनियुक्त चिकित्सक डॉ. शशि कुमार ने नए भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए वहां शिफ्ट होने से साफ इंकार कर दिया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इतने असुरक्षित भवन में मरीजों का इलाज करना और स्वास्थ्यकर्मियों का बैठना दुर्घटना को न्योता देना है। डॉक्टर ने इस संबंध में जिलाधिकारी (डीएम) और असैनिक शल्य चिकित्सक सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (सिविल सर्जन) को लिखित आपत्ति दर्ज कराई।

इसके बाद डीएम के आदेश पर डीपीएम और बीएमएसआईसीएल (BMSICL) के अभियंताओं ने मौके पर पहुंचकर जांच की, लेकिन जांच के बाद केवल मरम्मत और रंगाई-पुताई कर इसे अस्पताल संचालन योग्य बताने की कोशिश की गई।

दो साल पहले ही हो चुका है भुगतान, विधायक ने डीएम से की उच्चस्तरीय जांच की मांग

स्थानीय ग्रामीणों और प्रबुद्ध लोगों का कहना है कि भवन के निर्माण का भुगतान करीब दो वर्ष पहले ही संवेदक को कर दिया गया था, लेकिन तकनीकी जांच और हैंडओवर के बिना ही इमारत जर्जर होने लगी।

मामला तूल पकड़ते ही परबत्ता विधायक बाबूलाल शौर्य ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच समिति से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। विधायक ने अपने पत्र में कहा कि भवन का निर्माण सालों पहले पूरा होने के बावजूद अब तक विधिवत उद्घाटन नहीं हुआ

और दरारें पड़ गईं। उन्होंने इसमें संलिप्त अधिकारियों, अभियंताओं और संवेदक (ठेकेदार) के खिलाफ कठोर कानूनी व अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग उठाई है।

"भवन का निर्माण कई वर्ष पहले कराया गया था, लेकिन अब तक इसका विधिवत उद्घाटन भी नहीं हो सका है और इसमें दरारें आने लगी हैं। मैंने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर एक उच्चस्तरीय जांच समिति गठित कर स्थल निरीक्षण कराने तथा अनियमितता के दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, अभियंताओं व संवेदक पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।"

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— बाबूलाल शौर्य, विधायक, परबत्ता

"नए भवन में अस्पताल स्थानांतरित करने का मौखिक निर्देश मिलने के बाद जब मैंने भवन का जायजा लिया, तो उसकी स्थिति बेहद असुरक्षित पाई। इतने कमजोर और दरार पड़े भवन में अस्पताल चलाना सुरक्षा के दृष्टिकोण से उचित नहीं लगा। इसलिए मैंने डीएम और सिविल सर्जन को लिखित रूप से सूचित कर सुरक्षा संबंधी चिंता जताई है।"

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— डॉ. शशि कुमार, प्रतिनियुक्त चिकित्सक (APHC डुमरिया बुजुर्ग)