खगड़िया। बाढ़ के साथ कटाव भी जिले में बड़ा मुद्दा है। इस वर्ष भी कोसी-बागमती के कटाव से लोग परेशान रहे हैं। अलौली प्रखंड के उत्तरी बोहरवा गांव में लगभग 50 घर इस वर्ष बागमती नदी में समा गए। स्थानीय कृष्णनंदन पंडित ने बताया कि मात्र आठ परिवार को प्रशासन की ओर से प्लास्टिक सीट दिया गया। पीड़ित परिवार जैसे-तैसे गुजर-बसर कर रहे हैं। अधिकारी और जनप्रतिनिधि झांकने तक नहीं आए। जिप सदस्य और सीआई ने यहां आकर औपचारिकता पूरी की। अलौली विधायक चंदन कुमार ने कहा कि उत्तरी बोहरवा में कटाव निरोधात्मक कार्य को लेकर अधिकारियों का कई बार ध्यान आकृष्ट कराया गया है।

अभी बेलदौर प्रखंड में कोसी उफान पर है। नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव जारी है। इस बीच पंचबीघी गांव के समीप कोसी कटाव कर रही है। बीते तीन दिनों के अंदर दो परिवारों मनोज पासवान और जयजयराम यादव के घर कोसी नदी में विलीन हो चुके हैं। वहीं लगभग एक दर्जन से अधिक घरों पर कटाव के खतरे मंडरा रहे हैं। यहां करीब तीन सौ परिवार निवास करते हैं। जिन पर विस्थापन का खतरा चौथी बार मंडरा रहा है। कोसी कटाव स्थल से गांव की दूरी घटकर 10 मीटर शेष रह गई है। अगर कटाव की रफ्तार पर विराम नहीं लगा तो दो-चार दिनों में ही गांव का भौगोलिक नक्शा बदल सकता है। इतमादी मुखिया हिटलर शर्मा ने कहा कि गांव उजड़ रहा है, लेकिन प्रशासन संवेदनहीन है। पंचबीघी गांव के देवशरण पासवान, नेपल पासवान, दयानंद पासवान, रूपेश पासवान, विलास पासवान, मिथिलेश पासवान, मुकेश पासवान, बाल्मीकि पासवान, मुन्ना पासवान, राजेश पासवान के घर कभी भी कोसी में विलीन हो सकते हैं। ''पंचबीघी गांव को कटाव से बचाने के लिए विभागीय पदाधिकारी का ध्यान आकृष्ट कराया जा रहा है। ''

अमित कुमार, सीओ, बेलदौर

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