संवाद सूत्र, कटिहार: मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए सदर अस्पताल में निजी स्वास्थ्य संस्थान और सरकारी अस्पताल के महिला और शिशु रोग विशेषज्ञों की एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई।

कार्यशाला का शुभारंभ सिविल सर्जन डा. डीएन पांडेय, अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डा. कनक रंजन, जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम किसलय कुमार ने संयुक्त रूप से किया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए सीएस ने कहा कि मातृ व शिशु दर में कमी लाने के लिए शत प्रतिशत रिपोर्टिग और उसकी समीक्षा करने की जरूरत है।

राज्य स्वास्थ्य समिति के प्रतिनिधि के रूप में निपी संस्था के गौरव कुमार, तथा केयर इंडिया के जयकिशन ने इसको लेकर चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया। कार्यशाला में बताया गया कि मातृ व शिशु मृत्यु के कारणों का सटीक विश्लेषण रिपोर्टिंग और समीक्षा से सही ढंग से की जा सकती है। प्रशिक्षण में जिले के सभी प्रखंडों से स्वास्थ्य अधिकारी, महिला व शिशु चिकित्सक, जिले के चिन्हित प्राइवेट अस्पतालों की महिला व शिशु रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों ने भाग लिया।

बताया गया कि सरकारी या प्राइवेट किसी भी अस्पताल में अगर किसी भी गर्भवती या शिशु की मृत्यु होती है तो इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को देना जरूरी है। कई निजी अस्पतालों से कार्रवाई की डर से रिपोर्टिंग नहीं की जाती है। इसके कारण मृत्यु के कारणों का पता नहीं चल पाता है।

राज्य में 20 प्रतिशत महिलाओं की मृत्यु गर्भकाल के दौरान, पांच प्रतिशत मृत्यु प्रसव के समय, 50 प्रतिशत मृत्यु प्रसव होने के 24 घंटे के भीतर, , 20 प्रतिशत प्रसव के सात दिन के भीतर तथा पांच प्रतिशत मृत्यु दो से छह सप्ताह के दौरान होने की बात सामने आयी है। इसे रोकने के लिए उनकी मृत्यु का कारणों की पड़ताल आवश्यक है इसलिए सभी अस्पतालों को मृत्यु की जानकारी समय पर स्वास्थ्य विभाग को देना जरूरी है। मातृ मृत्यु को रोकने के लिए सरकार द्वारा प्रसव के दौरान उपलब्ध कराई जा रही सुविधा की जानकारी दी जाए जिससे कि लोग उसका लाभ उठा सकें। सरकारी स्तर से प्रसव को लेकर उपलब्ध कराई जा रही सुविधा की जानकारी भी आमलोगों को दी जाए। मातृ मृत्यु को रोकने के लिए सरकार द्वारा सुमन कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। इसके तहत अगर कोई इसके अतिरिक्त एमडीएसआर के तहत आशा को मातृ मृत्यु की सुचना देने के लिए 200 रुपये दिए जाते हैं।

Edited By: Jagran