नीरज कुमार, कटिहार : वैश्विक परिप्रेक्ष्य में सांस्कृतिक प्रदूषण भी बड़ा खतरा बनकर सामने आ रहा है। आज की युवा पीढ़ी अपनी गौरवशाली संस्कृति से अनभिज्ञ होती जा रही है। संस्कृति की रक्षा से ही देश व समाज का हित किया जा सकता है। भौतिकवाद के इस दौर में भारतीय संस्कृति देश को समृद्ध बनाने के साथ लोगों को एकसूत्र में पिरोने का काम कर सकती है।

भारतीय संस्कृति से युवा पीढ़ी को अवगत कराने तथा अपनी संस्कृति की पहचान बनाए रखने को लेकर शहर के विनय भूषण संस्कृति परिषद चला रहे हैं। इसके माध्यम से कोसी, सीमांचल के जिलों में अभियान चला रहे हैं। विनय भूषण बताते हैं कि वर्तमान समय में पाश्चात्य संस्कृति का युवामन पर व्यापक असर हो रहा है। युवा पीढ़ी अपने महापुरूषों व ऐतिहसिक दिवस को तक को भूल रही है। समृद्ध संस्कृति के बूते ही भारत की पहचान कभी विश्वगुरु के रूप में थी। भारतीय जीवन पद्धति एवं संस्कार को अपनाकर ही संस्कृति को अक्षुण्ण रखा जा सकता है। समाज में परिवार में बिखराव का का मुख्य कारण अपनी संस्कृति से विमुख होना भी है। एकल परिवार की परिकल्पना से परिवार के साथ साथ सामाजिक दुराव भी होता है। इसका सीधा असर देश के विकास तथा समृद्धि पर होता है। संस्कृति से अनजान होने की स्थिति में नैतिकता में भी ह्रास होता है। भाषावाद व प्रांतवाद हावी होने से देश और समाज होता है। आपसी वैमनस्यता व जातीय हिसा की घटनाओं का कारण भी अपनी संस्कृति से भटकना है। विनय भूषण बताते हैं कि संस्कृति संरक्षण परिषद द्वारा कोसी, सीमांचल के विभिन्न जिलों में युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जुड़ाव के लिए कई कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। संस्कृति ज्ञान पाठशाला, महापुरुषों की जयंती व पुयतिथि समारोह का आयोजन सहित विचार गोष्ठी जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। देश के गुमनाम महापुरुषों की जीवनी से भी अवगत कराने का काम किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त प्रकृति पूजन, गो पूजन, धरती माता पूजन, मातृ-पितृ दिवस जैसे कार्यक्रमों से गौरवशाली संस्कृति की रक्षा को लेकर काम किया जा रहा है।

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