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सीमांचल में पहली बार जन्मी दुनिया की सबसे छोटी गाय! कटिहार गौशाला में पुंगनूर बछड़ा बना आकर्षण, PM मोदी भी हैं मुरीद

Published: Wed, 28 Oct 2026 02:44 PM (IST)

Bihar Punganur Cow Breed: कटिहार की पूर्णिमा देवी गौशाला में दुनिया की सबसे छोटी पुंगनूर नस्ल के बछड़े का जन्म ...और पढ़ें

HighLights

  1. कटिहार गौशाला में दुर्लभ पुंगनूर बछड़े का जन्म हुआ।

  2. यह दुनिया की सबसे छोटी, पौष्टिक दूध वाली गाय है।

  3. पीएम मोदी ने भी इस नस्ल की सराहना की है।

संवाद सूत्र, कदवा (कटिहार)। Bihar Punganur Cow Breed: दुनिया की सबसे छोटी मानी जाने वाली दुर्लभ गोवंश नस्ल 'पुंगनूर' (Punganur) के नन्हे बछड़े की चंचल अठखेलियों से कटिहार जिले के कदवा प्रखंड स्थित पूर्णिमा देवी गौशाला इन दिनों गुलजार हो उठी है। गौशाला परिसर में नन्हे बछड़े को उछलते-कूदते और फुदकते देख कर्मियों के चेहरे खिले हुए हैं। कभी विलुप्ति के गंभीर संकट से जूझ रही इस ऐतिहासिक नस्ल के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में गौशाला का यह प्रयास सीमांचल के पशुपालन क्षेत्र में नई उम्मीदें जगा रहा है।

गौशाला कर्मियों के अनुसार, परिसर में पुंगनूर नस्ल के दो बच्चों का जन्म हुआ है। इनमें एक बछिया करीब एक वर्ष की हो चुकी है, जबकि बछड़ा छह माह का है। कर्नाटक के बिरावल्ली से विशेष रूप से पुंगनूर नस्ल का सीमेन मंगाकर कृत्रिम गर्भाधान कराया गया था, जिसके बाद इन बच्चों का जन्म हुआ। नन्हे बछड़े की मासूमियत देखने के लिए आसपास के ग्रामीण लगातार गौशाला पहुंच रहे हैं और उसे दुलारते-पुचकारते नजर आते हैं।

Punganur Calf Born in Katihar Gaushala PM Modi Favorite Breed

3 फीट की कद-काठी, दूध में 8 प्रतिशत तक वसा

पुंगनूर गाय अपनी बेहद कम ऊंचाई और विशिष्ट शारीरिक गठन के लिए दुनिया भर में पहचानी जाती है। सामान्य तौर पर इसकी औसत ऊंचाई महज तीन फीट के आसपास होती है, जिसके कारण यह अन्य नस्लों की गायों से बिल्कुल अलग दिखाई देती है।

पुंगनूर नस्ल: एक नजर में मुख्य विशेषताएं

  • प्रजाति: पुंगनूर (दुनिया की सबसे छोटी कूबड़ वाली देसी गोवंश नस्ल)।

  • जन्म स्थल: पूर्णिमा देवी गौशाला, प्रखंड कदवा (कटिहार, बिहार)।

  • वर्तमान उम्र: बछिया (लगभग 1 वर्ष) और बछड़ा (लगभग 6 माह)।

  • औसत ऊंचाई: लगभग 3 फीट।

  • दूध उत्पादन क्षमता: 3 से 5 लीटर प्रतिदिन।

  • दूध की गुणवत्ता: लगभग 8% वसा (FSA), ए-2 (A2) बीटा-कैसीन प्रोटीन युक्त।

  • प्रजनन तकनीक: कर्नाटक (बिरावल्ली) से मंगाए गए सीमेन से कृत्रिम गर्भाधान।

पशुपालन से जुड़ी जानकारियों के अनुसार, यह नन्ही गाय प्रतिदिन औसतन तीन से पांच लीटर तक दूध देने में सक्षम है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसके दूध की पौष्टिकता है; जहां सामान्य गायों के दूध में वसा (फैट) की मात्रा अमूमन 3 से 5 प्रतिशत होती है, वहीं पुंगनूर के दूध में यह करीब 8 प्रतिशत तक पाई जाती है। इसके अलावा इसका दूध ए-2 (A2) प्रकार के बीटा-कैसीन प्रोटीन से भरपूर और स्वास्थ्य के लिए बेहद गुणकारी माना जाता है।

पीएम मोदी भी कर चुके हैं इस नस्ल की सराहना

पुंगनूर नस्ल को राष्ट्रीय स्तर पर उस वक्त विशेष पहचान मिली, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस दुर्लभ नस्ल की गाय को दुलारते और चारा खिलाते हुए तस्वीर सामने आई थी। इसके बाद छोटे कद वाली इस शांत और आकर्षक देसी गाय को लेकर देशभर के पशुपालकों में दिलचस्पी तेजी से बढ़ी। देश के विभिन्न हिस्सों में अब स्वदेशी गोवंश की नस्लों के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

Punganur Calf Born in Katihar Gaushala PM Modi Favorite Breed (1)

ब्राजील की 'ग्रिलैंडो' पर भी प्रयोग

पूर्णिमा देवी गौशाला में पुंगनूर नस्ल के बच्चों का जन्म गव्य विकास की दिशा में किए जा रहे अभिनव प्रयासों की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। गौशाला प्रबंधन की ओर से दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए अधिक दूध देने वाली ब्राजील की प्रसिद्ध 'ग्रिलैंडो' नस्ल की गाय से जुड़े प्रजनन प्रयास भी किए जा रहे हैं।

गव्य विकास को नई उड़ान

इसके लिए संबंधित नस्ल का सीमेन मंगाकर कृत्रिम गर्भाधान कराया गया है। ग्रिलैंडो गाय प्रतिदिन 100 से 130 लीटर तक दूध देने की क्षमता रखती है। गौशाला के इन वैज्ञानिक प्रयासों से स्थानीय पशुपालकों को भी उन्नत गोपालन और बेहतर आय की नई संभावनाएं मिलने की उम्मीद है।

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