20 हजार एकड़ दियारा और सुरक्षा में सिर्फ 8 जवान, मनिहारी में हत्या के बाद फिर उभरा दियारा का खूनी इतिहास
मनिहारी के दियारा क्षेत्र में हालिया हत्या ने आपराधिक गतिविधियों के फिर से बढ़ने की आशंका जताई है, जिससे इस इलाके का खूनी इतिहास ताजा हो गया है।

मनिहारी में हत्या
HighLights
मोहनपुर दियारा में हत्या से आपराधिक खौफ फिर बढ़ा।
20 हजार एकड़ दियारा में सुरक्षा को सिर्फ एक पिकेट।
पुलिस के पास नाव न होने से अपराधी आसानी से भागते।
प्रीतम ओझा, मनिहारी (कटिहार)। आधिपत्य और वर्चस्व की लड़ाई में मनिहारी का दियारा क्षेत्र कई बार खून से लाल होता रहा है। पिछले करीब तीन वर्षों से अपेक्षाकृत शांति के बाद बुधवार रात कमालपुर से सटे मोहनपुर दियारा में गोली मारकर हत्या की घटना ने एक बार फिर दियारा में अपराधियों के सिर उठाने की आशंका बढ़ा दी है। भैंस खोलने के विवाद में पुत्र के सामने लालू यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
घटना के बाद दियारा में फिर खौफ का माहौल है। एक समय दियारा में लूट, छिनतई, हत्या, जमीन पर कब्जा और पशुपालकों व किसानों से रंगदारी की घटनाएं आम थीं। किसान दिन में भी खेत की मेढ़ तक जाने से डरते थे।
वारदात के बाद निकल भागने का सुरक्षित ठिकाना
घने कास और झोंआ के जंगल तथा गंगा की धाराओं से घिरा इलाका अपराधियों के लिए छिपने और वारदात के बाद निकल भागने का सुरक्षित ठिकाना बन जाता था। दियारा की कई घटनाएं आज भी लोगों के जेहन में हैं। करीब दो दशक पूर्व बैजनाथपुर दियारा के आसपास वर्चस्व की लड़ाई में प्रयाग सिंह गुट के प्रयाग सिंह, नृपत मंडल समेत आठ लोगों की हत्या कर दी गई थी।
18 सितंबर 2021 को काशीचक दियारा में कलाई फसल की बोआई करने गए भूतपूर्व सैनिक महेश यादव और उनके भाई सुनील यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसके कुछ समय बाद मिर्जापुर बघार दियारा में संजय यादव की हत्या कर दी गई।
चार शव बरामद किए गए
दिसंबर 2022 में मनिहारी से सटे बरारी क्षेत्र में मोहन ठाकुर और सुनील यादव गिरोह के बीच वर्चस्व को लेकर जमकर गोलीबारी हुई थी। इसमें अरविंद यादव समेत कई लोगों को गोली लगी थी। काफी खोजबीन के बाद चार शव बरामद किए गए थे। अप्रैल 2024 में बघार दियारा में कन्हाई यादव की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई।
मवेशी पालकों की मजबूरी, अपराधियों के लिए मौका
दियारा में पशुचारे की उपलब्धता के कारण बड़ी संख्या में पशुपालक मवेशियों के साथ बथान बनाकर रहते हैं। अपराधी इसी मजबूरी का फायदा उठाते हैं। आरोप है कि पशुपालकों से नियमित रंगदारी वसूली जाती है। इतना ही नहीं, अपराधियों की मांग पर दूध तक मुफ्त में देना उनकी मजबूरी बन जाती है।
20 हजार एकड़ दियारा, सुरक्षा के लिए एक पिकेट
गंगबरार और गंगसिकत सरकारी व रैयती जमीन मिलाकर करीब 20 हजार एकड़ में फैले दियारा क्षेत्र की सुरक्षा के लिए बैजनाथपुर में महज एक पुलिस पिकेट है। यहां छह से आठ जवानों की तैनाती बताई जाती है।
कमालपुर, बैजनाथपुर, महेशपुर और धुरियाही के दियारा क्षेत्रों के अलावा साहिबगंज, पीरपैंती और बरारी क्षेत्र की सीमाएं भी इससे जुड़ती हैं। ऐसे में सीमावर्ती और दुर्गम इलाके में पुलिस की चुनौती समझी जा सकती है।
उधार की नाव से गश्ती, अपराधियों को मिलता है समय
मनिहारी पुलिस के पास अपना नाव नहीं है। घटना के बाद किराये या उधार की नाव से पुलिस को दियारा पहुंचना पड़ता है। इस देरी का फायदा अपराधियों को मिलता है और वे वारदात के बाद आसानी से दूसरी सीमा में निकल जाते हैं। करीब दो दशक पहले तत्कालीन एसपी विनय कुमार ने गंगा में निगरानी के लिए फाइबर बोट उपलब्ध कराया था, लेकिन खराब होने के बाद वह अब कबाड़ में पड़ा है।
नए नाम ने बढ़ाई चिंता
बुधवार रात की घटना के बाद दियारा में अपराधियों के नए नामों की चर्चा शुरू हो गई है। इनमें बोलबम मंडल का नाम भी सामने आ रहा है। हालांकि पुलिस का कहना है कि दियारा में किसी भी नए आपराधिक गिरोह को पनपने नहीं दिया जाएगा।
दियारा की कुछ प्रमुख आपराधिक घटनाएं
- करीब दो दशक पूर्व: बैजनाथपुर दियारा के आसपास गैंगवार में प्रयाग सिंह गुट के प्रयाग सिंह, नृपत मंडल समेत आठ लोगों की हत्या।
- 18 सितंबर 2021: काशीचक दियारा में भूतपूर्व सैनिक महेश यादव और उनके भाई सुनील यादव की गोली मारकर हत्या।
- दिसंबर 2021: मिर्जापुर बघार दियारा में संजय यादव की गोली मारकर हत्या।
- दिसंबर 2022: बरारी क्षेत्र में मोहन ठाकुर और सुनील यादव गिरोह के बीच गोलीबारी, अरविंद यादव समेत कई लोग घायल।
- अप्रैल 2024: बघार दियारा में कन्हाई यादव की गोली मारकर हत्या।
अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए सघन छापामारी अभियान चलाया जा रहा है। - परिचय कुमार, एसपी कटिहार।
