कटिहार में छात्रा की पिटाई मामले में नया मोड़, शिक्षिका ने पंचायत पर लगाया वसूली का आरोप
उत्क्रमित मध्य विद्यालय झिकटिया की शिक्षिका आभा कुमारी ने 45 हजार रुपये के अर्थदंड मामले में प्रधानाध्यापक और शिक्षा समिति पर दबाव बनाकर राशि वसूलने का गंभीर आरोप लगाया है।

उत्क्रमित मध्य विद्यालय झिकटिया। फोटो जागरण
HighLights
शिक्षिका ने 45 हजार रुपये वसूली का आरोप लगाया।
प्रधानाध्यापक और शिक्षा समिति पर दबाव बनाने का आरोप।
डीईओ ने जांच और सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया।
संवाद सूत्र, कोढ़ा (कटिहार)। उत्क्रमित मध्य विद्यालय झिकटिया की शिक्षिका पर छात्रा की पिटाई के बाद पंचायती में लगाए गए 45 हजार रुपये के अर्थदंड के मामले में नया मोड़ आ गया है।
शिक्षिका आभा कुमारी ने प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को आवेदन देकर विद्यालय के प्रधानाध्यापक, एक सहायक शिक्षक तथा शिक्षा समिति के कुछ सदस्यों पर दबाव बनाकर राशि वसूलने का गंभीर आरोप लगाया है।
उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। शिक्षिका ने आवेदन में कहा है कि 10 जुलाई को उनके पर्स से 50 हजार रुपये गायब हो गए थे। इस संबंध में बच्चों से पूछताछ की गई।
पूछताछ के दौरान कुछ विद्यार्थियों ने एक छात्रा पर चोरी का संदेह जताया। इसी आधार पर छात्रा से पूछताछ की गई। शिक्षिका ने स्वीकार किया कि पूछताछ के दौरान छात्रा के बार-बार गलत जानकारी देने पर उन्होंने उसे दो-चार छड़ी मारी थी। बाद में समझाकर भविष्य में ऐसी गलती नहीं करने की सलाह भी दी गई।
20 हजार रुपये लेने से किया इनकार
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि घटना के बाद विद्यालय के प्रधानाध्यापक नरेश कुमार मंडल, सहायक शिक्षक आशीष कुमार, शिक्षक सकलदेव रविदास तथा दो टोला सेवकों ने जानबूझकर माहौल बिगाड़ दिया। इसके बाद 11 जुलाई को शिक्षा समिति, ग्रामीणों और शिक्षकों की बैठक बुलाई गई, जिसकी अध्यक्षता वार्ड सदस्य चंदन कुमार ने की।
शिक्षिका का आरोप है कि बैठक में उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया। उन्होंने हाथ जोड़कर माफी मांगी और भविष्य में ऐसी गलती नहीं दोहराने का भरोसा दिया।
इसके बावजूद बैठक में पहले दो लाख रुपये का जुर्माना तय किया गया। असमर्थता जताने पर कथित रूप से थाना में मामला दर्ज कराने और सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की धमकी देकर 50 हजार रुपये जमा करने का दबाव बनाया गया।
बाद में 45 हजार रुपये पर सहमति बनी और एक भी रुपये कम स्वीकार नहीं करने की बात कही गई। शिक्षिका के अनुसार उन्होंने 20 हजार रुपये देने की बात कही थी, लेकिन इसे अस्वीकार कर दिया गया।
चार दिन का समय मांगने पर भी कोई राहत नहीं दी गई। अंततः स्वजनों ने उधार लेकर 45 हजार रुपये की व्यवस्था की और विद्यालय परिसर में मौजूद लोगों के सामने यह राशि प्रधानाध्यापक को सौंप दी। शिक्षिका ने आवेदन में विद्यालय आने-जाने के दौरान अपनी सुरक्षा और सम्मान को भी खतरा बताया है।
आवेदन में लगाए गए आरोपों की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा समिति को अर्थदंड लगाने का कोई अधिकार नहीं है। विभाग इस सख्त एक्शन लेगा। -राहुल चंद्र चौधरी, डीईओ, कटिहार।
