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हरियाणा में पढ़ाई करता रहा सुपरवाइजर, गांव में उसकी ID से होती रही हाजिरी! कटिहार में खुली वीबी-जीरामजी की पोल

Published: Thu, 29 Oct 2026 09:30 PM (IST)

Katihar Kadwa MNREGA Scam: कटिहार के कदवा प्रखंड में मनरेगा डिजिटल हाजिरी में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। एक मेट ...और पढ़ें

Katihar Kadwa MNREGA Scam: कटिहार में डिजिटल हाजिरी में बड़ा खेल

Katihar Kadwa MNREGA Scam: कटिहार में डिजिटल हाजिरी में बड़ा खेल

HighLights

  1. मनरेगा डिजिटल हाजिरी में फर्जीवाड़े का सनसनीखेज खुलासा।

  2. मेट हरियाणा में पढ़ाई कर रहा था, हाजिरी बिहार में।

  3. फर्जी हाजिरी से सरकारी राशि के गबन की आशंका।

संवाद सूत्र, कदवा (कटिहार)। Katihar Kadwa MNREGA Scam:सरकारी विकास योजनाओं में पारदर्शिता लाने और फर्जी मस्टर रोल पर लगाम लगाने के लिए लागू की गई डिजिटल उपस्थिति (Digital Attendance) प्रणाली में बिचौलियों और भ्रष्ट कर्मियों ने सेंधमारी का नया तरीका निकाल लिया है। कटिहार जिले के कदवा प्रखंड की चंदहर पंचायत में इसका एक सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है।

यहां योजना की निगरानी करने वाला मेट (सुपरवाइजर) गांव से 1400 किलोमीटर दूर हरियाणा में बैठकर नियमित कॉलेज कर रहा था, और इधर पंचायत के सरकारी पोर्टल पर उसकी आईडी से मजदूरों की फर्जी हाजिरी धड़ल्ले से बनाई जा रही थी। तकनीक को धता बताकर किए जा रहे इस फर्जीवाड़े की कलई तब खुली, जब मेट छुट्टियों में अपने गांव लौटा।

चंदहर पंचायत के वार्ड संख्या 12 निवासी मो. सलीम अख्तर ने प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी (PO) देवेश गुप्ता को लिखित शिकायत सौंपकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की गुहार लगाई है। साथ ही आवेदन की प्रतिलिपि उप विकास आयुक्त (DDC) को भेजकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

रेवाड़ी में छात्र, पोर्टल पर एक्टिव था सुपरवाइजर

सलीम अख्तर ने बताया कि वह हरियाणा के रेवाड़ी स्थित मॉडर्न कॉलेज में डीएलएड (D.El.Ed) का नियमित छात्र है और लंबे समय से वहीं रहकर पढ़ाई कर रहा है। उसकी इस गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर प्रखंड और पंचायत स्तर के कर्मियों ने शातिराना खेल रच दिया।

पोर्टल पर सलीम की सहमति या जानकारी के बिना उसका पंजीकृत मोबाइल नंबर हटा दिया गया और उसकी जगह किसी अन्य अज्ञात व्यक्ति का नंबर मैप कर दिया गया। इसके बाद सलीम की मेट आईडी का दुरुपयोग कर अक्टूबर 2026 सहित बीते कई महीनों से मजदूरों की फर्जी उपस्थिति दर्ज की जाती रही। सलीम ने आशंका व्यक्त की है कि इस जाली उपस्थिति के आधार पर बड़े पैमाने पर सरकारी राशि की बंदरबांट और गबन किया गया है।

कर्मियों के सिंडिकेट पर मिलीभगत का आरोप

पीड़ित मेट ने इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे एक संगठित नेटवर्क का हाथ बताया है। उसने विभाग के कंप्यूटर ऑपरेटर, बीएफटी (बेयरफुट टेक्नीशियन) और पंचायत रोजगार सेवक (पीआरएस) की मिलीभगत का सीधा आरोप लगाया है।

सलीम का कहना है कि बिना ब्लॉक स्तर के ऑपरेटर और संबंधित तकनीकी कर्मियों की साठगांठ के पोर्टल पर पंजीकृत मोबाइल नंबर बदलना और लगातार फर्जी हाजिरी स्वीकृत होना संभव नहीं है। उसने मांग की है कि मामले की फॉरेंसिक और डिजिटल ऑडिट कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि फर्जी नंबर किसके नाम पर दर्ज था और भुगतान किसके खातों में भेजा गया।

पीओ ने शुरू कराई जांच, दोषियों पर गिरेगी गाज

इस संबंध में पूछे जाने पर कदवा के कार्यक्रम पदाधिकारी देवेश गुप्ता ने बताया कि मेट मो. सलीम अख्तर का शिकायती आवेदन प्राप्त हुआ है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है।

पीओ ने स्पष्ट किया कि पोर्टल के लॉग्स और हाजिरी के तकनीकी डेटा की पड़ताल की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर संलिप्त कर्मियों को चिह्नित कर उनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने सहित कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।