Banana Price Drop: भादो शुरू होते ही गिरा केले का भाव, कटिहार में किसानों की बढ़ी चिंता
सावन में केले के अच्छे भाव से खुश किसानों को भादो आते ही मंदी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।

भादो शुरू होते ही गिरा केले का भाव, किसानों की बढ़ी चिंता
HighLights
सावन में अच्छे भाव के बाद भादो में केला सस्ता हुआ।
किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
फलका में केला आधारित उद्योग लगाने की मांग की गई।
संवाद सूत्र, पोठिया (कटिहार)। सावन महीने में केले का बेहतर भाव मिलने से किसानों के चेहरे पर खुशी थी, लेकिन भादो शुरू होते ही बाजार में अचानक मंदी आ गई। सावन में 300 से 400 रुपये प्रति खांदी बिकने वाला केला अब महज 150 से 170 रुपये प्रति खांदी अथवा सात से आठ रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है।
कम भाव के कारण तैयार फसल के खरीदार तलाशने में किसानों को परेशानी हो रही है। फलका प्रखंड क्षेत्र के शब्दा, लोहनी, पोठिया, भंगहा, बरेटा, रहटा, गोविंदपुर समेत आसपास के इलाके केला उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं। पि
छले कुछ वर्षों में पनामा विल्ट रोग के कारण केला का रकबा घट गया था। तीन-चार वर्षों तक बेहतर भाव मिलने के बाद किसानों ने फिर से केला की खेती का जोखिम उठाया।
कृषि वैज्ञानिकों के दिशा-निर्देश पर टिश्यू कल्चर पौधों से खेती शुरू की गई। बेहतर उत्पादन और कीमत की उम्मीद में किसानों ने बड़े पैमाने पर फसल लगाई।
किसानों के अनुसार, पिछले वर्षों में केला 300 से 500 रुपये प्रति खांदी तक बिका है। कई बार 20 से 25 रुपये प्रति किलो तक भी कीमत मिली। इस वर्ष सावन में 300 से 400 रुपये प्रति खांदी का भाव मिलने से किसानों को राहत मिली थी, लेकिन भादो आते ही स्थिति बदल गई।
किसान अवधेश मंडल, राकेश मंगल, प्रवेज आलम, गेनौरी, शहजाद आलम, नीतीश मंडल व आशिफ ने बताया कि एक बीघा केला की खेती में करीब एक से सवा लाख रुपये खर्च होते हैं। वर्तमान भाव में लागत निकालना भी मुश्किल है।
किसानों ने बताया कि पनामा विल्ट रोग से भी बड़ी मात्रा में फसल प्रभावित हुई है। प्राकृतिक आपदाओं के साथ बाजार की मंदी ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है।
किसानों ने सरकार से फलका क्षेत्र में केला आधारित उद्योग स्थापित कराने की मांग की है। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण उद्योग स्थापित होने से उपज की खपत बढ़ेगी और किसानों को फसल का उचित मूल्य मिल सकेगा।
