कटिहार। बलरामपुर प्रखंड मे लघु एवं कुटीर उद्योग की स्थिति काफी दयनीय हो चुकी है। उद्योग के संचालन और इसके विकास को लेकर सकारात्मक पहल नहीं होने के कारण क्षेत्र के लोग रोजगार संकट से जूझ रहे हैं। क्षेत्र में विद्युतीकरण की समस्या के साथ ही सरकारी स्तर पर कुटीर उद्योगों की स्थापना और संचालन के साथ ही आधारभूत संरचना का अभाव कुटीर उद्योग के विकास में बड़ा रोड़ा बन रही है। बिजली की समस्या के कारण संचालित उद्योग भी बंदी के कगार पर पहुंच चुके हैं। जबकि क्षेत्र में कृषि आधारित कुटीर एवं लघु उद्योग की अपार संभावना हैं। लेकिन पूंजी के साथ ही संसाधन का अभाव इसके विकास में बाधक है। जबकि प्रखंड के सीमावर्ती पश्चिम बंगाल के टुनीदीघी, करणदीघी, दालकोला, बिलासपुर आदि स्थानों पर कुटीर उद्योगों को बेहतर संचालन हो रहा है। पश्चिम बंगाल के राइस मिलों में इस क्षेत्र का धान पहुंच रहा है, जबकि जूट आधारित उद्योग नहीं रहने के कारण इसका भी विकास नहीं हो रहा है। वहीं मधुमक्खी पालन, मुर्गी पालन, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन सहित अन्य उद्योगों का भी समुचित विकास नहीं हो पा रहा है। इसके कारण क्षेत्र के लोग रोजगार की तलाश में महानगरों में पलायन करने को विवश है। स्थानीय लोगों ने प्रशिक्षण की व्यवस्था कर कुटीर उद्योग के विकास को लेकर पहल की मांग की है।

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