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कटिहार में गंगा-कोसी के उफान से तबाही, कुरसेला के दर्जनों गांवों में घुसा पानी; ड्रम की नाव-तिरपाल के सहारे जिंदगी

Published: Sat, 05 Sep 2026 06:56 PM (IST)

कटिहार के कुरसेला प्रखंड में गंगा और कोसी नदियों के उफान से दर्जनों गांव जलमग्न हो गए हैं, जिससे बाढ़ पीड़ितों का जीवन दुश्वार हो गया है।

ड्रम की नाव-तिरपाल के सहारे जिंदगी

ड्रम की नाव-तिरपाल के सहारे जिंदगी

HighLights

  1. गंगा-कोसी के उफान से कुरसेला के दर्जनों गांव जलमग्न।

  2. बाढ़ पीड़ित ड्रम की नाव, तिरपाल के सहारे रह रहे।

  3. प्रशासन से मदद न मिलने पर लोगों में भारी रोष।

संवाद सूत्र, कुरसेला (कटिहार)। गंगा और कोसी नदियों के उफान ने एक बार फिर कटिहार जिले के कुरसेला प्रखंड के दर्जनों गांवों को अपनी आगोश में ले लिया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और ऊपर से घिरे पानी के बीच बाढ़ पीड़ितों का जीवन दुश्वारियों के दलदल में फंस गया है।

जलमग्न गांव और बेबस जिंदगी

पूर्वी मुरादपुर पंचायत के बसुहार मजदिया, तीनघरिया, खेरिया समेत लगभग 08 बाढ़ प्रभावित गांवों में तबाही का मंजर साफ देखा जा सकता है। चंदा देवी, विभीषण सहनी, अखिलेश महतो, अवधेश सहनी और शीतल मंडल जैसे बाढ़ पीड़ितों का दर्द साफ झलकता है। 

लोगों ने बताया कि घर डूबने के बाद अब वे प्लास्टिक के ड्रमों को जोड़कर बनाई गई अस्थायी नावों (डेंगी) और प्लास्टिक की पन्नी से ताने गए आशियानों के सहारे ऊंचे स्थानों पर रहने को विवश हैं। 

सुरक्षा की तलाश में इन परिवारों ने अपने मासूम बच्चों और मवेशियों के साथ रेलवे लाइन तथा माल गोदाम के किनारों पर शरण ले रखी है। लेकिन यहां भी मुश्किलें कम नहीं हैं। मवेशियों के रहने की उचित जगह नहीं है और उनके लिए चारे का भी भारी अभाव है।

संपर्क पथ कटा

पत्थर टोला जाने वाले मुख्य संपर्क मार्ग पर पानी भर जाने से आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। पत्थर टोला, गुमटी टोला, मोकना टोला और मेहर टोला के विद्यालयों में बाढ़ का पानी घुस जाने से बच्चों की पढ़ाई लिखाई ठप हो गई है। 

स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल आने वाली बाढ़ और नदी के कटाव से उनकी सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि गंगा और कोसी में विलीन हो चुकी है, लेकिन आज तक कटाव का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। 

सूखा राशन या प्लास्टिक शीट का वितरण किया गया

पीड़ित परिवारों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में अब तक प्रशासन या अंचल कार्यालय की ओर से कोई सुधि लेने नहीं आया है। न तो उनके लिए नावों की व्यवस्था की गई है, और न ही सूखा राशन या प्लास्टिक शीट का वितरण किया गया है। 

खर्राधार के समीप सड़क पर पानी चढ़ने और लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण शुद्ध पेयजल मिलना दूभर हो गया है। इसके अलावा, बाढ़ के पानी में विषैले जीव-जंतुओं के विचरण से हर समय किसी अनहोनी का डर बना रहता है।