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कटिहार में उफान पर गंगा और कोसी, दर्जनों गांवों में घुसा बाढ़ का पानी; पलायन को मजबूर लोग

By Tarzan AryanEdited By: Nishant Bharti
Published: Wed, 09 Sep 2026 11:41 AM (IST)

कटिहार के कुरसेला प्रखंड में गंगा और कोसी नदियों का जलस्तर बढ़ने से भीषण बाढ़ आ गई है। कोसी खतरे ...और पढ़ें

HighLights

  1. कोसी नदी खतरे के निशान से 156 सेमी ऊपर बह रही है।

  2. दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी घुसा, सड़क संपर्क कटा।

  3. फसलें नष्ट हुईं, लोग सुरक्षित स्थानों पर पलायन को मजबूर।

संवाद सूत्र, कुरसेला (कटिहार)। कुरसेला प्रखंड में गंगा और कोसी नदी के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि ने विकराल रूप ले लिया है। कोसी नदी वर्तमान में खतरे के निशान से 156 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है, और यह अब हाई फ्लड लेवल (HFL) के निशान से मात्र 54 सेंटीमीटर नीचे रह गई है। नदियों के इस उफान से इलाके में बाढ़ का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।

इन इलाकों में घुसा पानी और कटा संपर्क

पत्थर टोला, मलीनिया, मिर्जापुर, बाघमारा, पचकुट्टी, मेहर टोला, कमलाकानी, खेरिया, तीनघरिया, बालू टोला, मजदिया, कटरिया, चायटोला और शेरमारी समेत कई गांवों के सैकड़ों घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। 

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गंगा पार स्थित गोबराही दियारा का घाट टोला, धनेशर टोला, कैंप टोला और स्कूल टोला पूरी तरह टापू में तब्दील हो चुके हैं। पत्थर टोला और बाघमारा का प्रखंड मुख्यालय से सीधा सड़क संपर्क कट गया है।

जनजीवन अस्त-व्यस्त और परिवहन के संकट

आवागमन का एकमात्र सहारा: बाढ़ के कारण प्रखंड के लगभग डेढ़ दर्जन स्कूल प्रभावित हो चुके हैं और अब नाव ही आवागमन का मुख्य साधन बचा है। मजदिया और कमलाकानी की सड़कों पर पानी भर जाने के कारण लोगों को ट्रैक्टर के माध्यम से सुरक्षित निकाला जा रहा है।

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पानी के बीच फंसे लोग सांप और बिच्छू जैसे विषैले जीवों के भय के साये में ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को विवश हैं। वहीं बाढ़ की इस विभीषिका से किसानों की कमर टूट गई है। खेतों में लगी मक्का, पटसन (जूट) और अन्य खरीफ फसलें पूरी तरह डूबकर नष्ट हो चुकी हैं। 

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ग्रामीण अपने मवेशियों और परिवार के साथ सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। प्रशासन और स्थानीय स्तर पर राहत एवं बचाव कार्यों को तेज करने की आवश्यकता है।