विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

मकरसंक्रांति पर अनोखी परंपरा : मन्नत के लिए बांधते हैं मिट्टी का ढेला, इस तरह होती है विशेष पूजा

Published: Wed, 07 Jan 2026 06:40 PM (IST)

कटिहार के आजमनगर प्रखंड में मकर संक्रांति पर अनोखा 'ढेलबन्हा मेला' लगता है। यहां श्रद्धालु पोखर में स्नान कर मन्नत ...और पढ़ें

मकरसंक्रांति पर अनोखी परंपरा, कटिहार में होती है विशेष पूजा।

मकरसंक्रांति पर अनोखी परंपरा, कटिहार में होती है विशेष पूजा।

HighLights

  1. कटिहार में मकर संक्रांति पर अनोखा ढेलबन्हा मेला।

  2. मन्नत पूरी करने के लिए मिट्टी के ढेले बांधे जाते हैं।

  3. यह परंपरा 1951 में शुरू हुई, अब आस्था का केंद्र।

संवाद सूत्र, सालमारी (कटिहार)। मकरसंक्रांति पर अनोखी परंपरा : कटिहार में मकरसंक्रांति पर विशेष परंपरा है। मन्नत के लिए यहां काफी संख्या में लोग पहुंचते हैं। इसके लिए विशेष पद्धति से पूजा अर्चना भी करते हैं। आजमनगर प्रखंड क्षेत्र के पासोल दमाईपुर में एक अनोखी परंपरा वर्षों से चली आ रही है। मकर संक्रांति पर लगने वाले मेले में इस परंपरा का अनोखा रूप लोगों को देखने को मिलता है।


मेला परिसर स्थित पोखर में स्नान करते हैं श्रद्धालु

मान्यता अनुसार मकर संक्रांति के अवसर पर खास मन्नत के लिए मेला परिसर स्थित पोखर में स्नान कर मिट्टी के ढेले को धागे में बांध यहां लटकाया जाता है। इन ढेलों को बांस के लगे ढट्ठों से लटका दिया जाता है। लोगों में यह विश्वास है कि ऐसा करने से हर मुराद पूरी होती है। इस कारण ही इस मेले की प्रसिद्धि से साल दर साल श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती जा रही है।


उम्मीदों का ढेला

कटिहार जिले के अतिरिक्त आस-पास के कई जिलों व पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों से भी लोग उम्मीदों का ढेला मन्नत के रूप में यहां बांध कर जाते हैं। मान्यता पूरी होने पर पुन: लोग अपना ढेला खोलने यहां पहुंचते हैं। सन 1951 में एक स्थानीय ग्रामीण द्वारा इस प्रथा की शुरुआत की गयी थी। इसके बाद यह मेला उम्मीद लिए आए हजारों लोगों के आस्था का केंद्र बन गया है। इस मेले को लोग ढेलबन्हा मेला के नाम से भी जानते हैं।


यहां लगता है मेला

प्रत्येक वर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित इस मेले को ले महीनों पूर्व से तैयारियां आरंभ हो जाती है। विधायक, सांसद, एमएलसी हर वर्ष इस मेले में मन्नतों का ढेला बांधने पहुंचते हैं।इस एक दिवसीय मेले में काष्ठ निर्मित सामानों की भी खूब बिक्री होती है। बड़ी तादाद में काष्ठ निर्मित पलंग, चौकी, बेंच, कुर्सी व अन्य सामानों की दुकानें यहां लगाई जाती है। वहीं ग्रामीण परिवेश की स्वादिष्ट पकवानों की दुकानें भी सजी रहती है। लोगों द्वारा पूजा अर्चना कर मन्नतों का ढ़ेला बांधा जाएगा।