कैमूर के महिला अल्पावास गृह के निचले स्तर के जिन कर्मियों को संवासिनों के उत्पीड़न के लिए आरोपित किया गया है उनमें से कुछ खुद भी आर्थिक शोषण के शिकार थे। इस बात का खुलासा अल्पावास गृह के एक प्रहरी के हालिया बयान से हुआ है। कुदरा के लालापुर में मौजूद महिला अल्पावास गृह का खुद को चौकीदार बताने वाले भगवानपुर थाना के पिहरा गांव के निवासी सुदर्शन राम ने हाल ही में मीडिया को दिए गए बयान में कहा है कि उसे मात्र 3000 रुपये की मासिक पगार दी जाती थी। यही नहीं उसकी वर्ष 2015 की साल भर की पगार उसे नहीं दी गई थी। बताते चलें कि टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) की सामाजिक अंकेक्षण रिपोर्ट आने के बाद महिला विकास निगम के जिला परियोजना प्रबंधक द्वारा पिछले वर्ष भभुआ महिला थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में सुदर्शन राम को निचले स्तर के दो अन्य कर्मियों लालापुर के ¨पटू पाल व बैजनाथपुर की तारा देवी के साथ महिला अल्पावास गृह की संवासिनों के उत्पीड़न के मामले में आरोपित किया गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जब मामले की जांच सीबीआई ने अपने हाथों में ली तो इस वर्ष जनवरी माह में उसके द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी में भी इन तीनों को आरोपित किया गया है। यह भी बता दें कि हाल ही में सीबीआई द्वारा कैमूर जिले में आकर जिन लोगों से मामले में पूछताछ की गई है उनमें सुदर्शन राम भी शामिल है। सुदर्शन राम की मानें तो केंद्रीय जांच एजेंसी ने उसके काम करने के घंटे, उसकी तनख्वाह, संवासिनों को मिलने वाली सुविधाओं तथा उनकी स्थिति के बारे में उससे पूछताछ की। बता दें कि प्रदेश के समाज कल्याण विभाग के अनुदान से चलने वाला कैमूर जिले का महिला अल्पावास कुदरा प्रखंड के लालापुर में वहीं के एनजीओ ग्राम स्वराज सेवा संस्थान द्वारा चलाया जाता था। इसके संचालन के पीछे सरकार का उद्देश्य यह था कि परिवार अथवा समाज से उपेक्षित महिलाओं को आश्रय, परामर्श व प्रशिक्षण देकर उनके पुनर्वास की व्यवस्था की जा सके। बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग के निर्देश पर सूबे के आश्रय गृहों का सामाजिक अंकेक्षण करने वाली मुंबई की संस्था टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज ने मुजफ्फरपुर के बालिका गृह सहित जिन 17 आश्रय गृहों की स्थिति को ¨चताजनक बताया था उनमें लालापुर का महिला अल्पावास गृह भी शामिल था। रिपोर्ट में कैमूर जिले के 2 आश्रय गृहों की स्थिति को ¨चताजनक बताया गया था। ¨चताजनक स्थिति में बताया गया दूसरा आश्रय गृह जिला मुख्यालय भभुआ में ज्ञान भारती द्वारा संचालित विशिष्ट दत्तक ग्रहण एजेंसी थी। जब मुजफ्फरपुर बालिका गृह में उत्पीड़न के खौफनाक मंजर सामने आए तो सुप्रीम कोर्ट ने उसकी जांच सीबीआई से कराने का निर्णय लिया। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने लालापुर के महिला अल्पावास गृह समेत शेष 16 मामलों की जांच को भी सीबीआई को सौंप दिया।

Posted By: Jagran