अप्रैल माह में तपते सूरज की गर्मी से जनजीवन बेहाल है। गर्मी के प्रारंभिक दौर में ही जब ये हाल है तो आगे क्या होगा इसको लोग अच्छी तरह महसूस कर रहे हैं। अप्रैल माह में ही जल स्तर नीचे चला गया है। जिससे चापाकल जवाब देने लगे हैं। ऐसे में पेयजल की समस्या गहराने लगी है। इस समस्या से निजात के लिए मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना की परिकल्पना की गई। जिसमें हर व्यक्ति को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए हर घर नल जल योजना बनी है। हर पंचायत के प्रत्येक वार्ड में इस योजना के तहत बोरिग कराने के बाद टंकी बैठा कर उससे पाइप के द्वारा घरों में जलापूर्ति करना है। इस को कार्यान्वित कराने के लिए वार्ड सदस्यों को अधिकृत किया गया था। हर घर नल जल योजना में इतनी धांधली हुई है कि अगर ठीक से जांच कराई जाए तो इसमें कई सफेदपोश भी शामिल नजर आएंगे। इस योजना में राशि की खूब बंदरबांट हुई है। वार्ड सदस्यों द्वारा ठेकेदारों और माफियाओं को इस योजना का ठेका दे दिया गया। जो मनमाने ढंग से कार्य किए हैं। प्रखंड के कई ऐसे पंचायत हैं जिसके वार्डों में आठ-आठ महीने से बोरिग करा कर छोड़ दिया गया है। जानकारों की माने तो बोरिग कराकर अधिक दिनों तक छोड़ने पर उसकी गुणवत्ता प्रभावित होती है। चालू होने के बाद बोरिग कब जवाब दे देगा कहना मुश्किल है। हर घर नल जल योजना को ले जब जब पदाधिकारी सख्त होते हैं तब तब संवेदक कुछ कुछ काम कराते है। संवेदकों द्वारा गलियों में पाइप बिछाने का कार्य काफी धीमा है। जिसे देखने से लगता है कि गर्मी माह में ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध होना नामुमकिन है। संवेदक व वार्ड सदस्यों की मिलीभगत से यह खेल चल रहा है। कहीं कहीं तो पंचायत के मुखिया भी इस खेल में शामिल हैं। मोहनियां प्रखंड का पकड़िहार गांव पेयजल की समस्या से जूझ रहा है। यहां वार्ड संख्या आठ में करीब आठ माह पूर्व हर घर नल जल योजना के तहत वार्ड सदस्य द्वारा अपने घर के सटे बोरिग कराया गया है। अब धीरे धीरे पाइप बिछाने का कार्य शुरू हुआ है। यह कार्य की मानक के अनुरूप नहीं हो रहा है। पाइप बिछाने के लिए छह से आठ इंच गहरा गड्ढा खोदा गया है। जिसमें पाइप बिछाने के बाद कम समय में ही क्षतिग्रस्त होना तय है। गांव में शिव मंदिर के समीप लगा सरकारी चापाकल एक साल से गंदा पानी दे रहा है। ग्रामीणों के अलावा इसी रास्ते से प्रतिदिन काफी संख्या में राहगीर गुजरते हैं। जिन्हें पेयजल के लिए तरसना पड़ता है। पकड़िहार के ग्रामीण आलोक सिंह, श्याम लाल चौधरी, राम सिगासन सिंह, धर्मदेव चौधरी इत्यादि ने बताया कि सरकारी तौर पर लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए हर घर नल जल योजना बनाई गई है। लेकिन इसका लाभ पकड़िहार के ग्रामीणों को नहीं मिल रहा है। आठ माह में सिर्फ बोरिग का कार्य

आठ माह पहले इस योजना के तहत वार्ड सदस्य द्वारा अपने घर के समीप केवल बोरिग कराया गया है। इसके बाद चबूतरा बनाकर इसे ढंक दिया गया है। संवेदक द्वारा जलापूर्ति के लिए गलियों में पाइप बिछाया जा रहा है। एक माह बाद भी यह कार्य आधा अधूरा ही है। ग्रामीणों को समझ में नहीं आता कि इस गर्मी में उक्त योजना के तहत उन्हें पेयजल उपलब्ध हो पाएगा या नहीं। शिव मंदिर के समीप लगा सरकारी चापाकल एक साल से गंदा पानी दे रहा है। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के जिम्मे पेयजल की व्यवस्था है। विभागीय पदाधिकारियों को लगातार इसकी सूचना दी गई लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। गत वर्ष भी इस गांव में पेयजल की किल्लत हुई थी। जिसके कारण ग्रामीणों को नदी के पानी का सहारा लेना पड़ा था। पेयजल समस्या को ले विभाग गंभीर नहीं

पीएचईडी के पदाधिकारी पेयजल की समस्या को लेकर गंभीर नहीं हैं। हर घर नल जल योजना ग्रामीणों के लिए छलावा बनकर रह गई है। जब एक साल में इस योजना के तहत लोगों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल सका तो आगे क्या होगा कहना मुश्किल है। पदाधिकारियों का भी इस योजना पर ध्यान नहीं है। इसके वजह से संवेदकों की मनमानी चरम पर है। क्या कहते हैं पदाधिकारी-जो वार्ड सदस्य योजना के नाम पर राशि की अग्रिम निकासी किए हैं उन्हें नोटिस भेजी जा रही है। इसके बाद कार्रवाई होगी।

- कृष्णानंद पंडित, प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी

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