कैमूर। जिले के विभिन्न प्रखंडों में डीएम नवल किशोर चौधरी के निर्देश पर पीएचईडी विभाग द्वारा खराब चापाकल बनाने के लिए भले ही मिस्त्रियों की टीम भेजी गई है। लेकिन अभी भी जिले के किसी प्रखंड में पेयजल संकट दूर नहीं हो रहा है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के संकट से निपटने के लिए प्रशासन द्वारा कार्रवाई तो की गई, लेकिन जिला मुख्यालय भभुआ में स्थित अटल बिहारी ¨सह उच्च विद्यालय में उत्पन्न पेयजल संकट को दूर कराने के लिए अब तक कोई पदाधिकारी आगे नहीं आया। इस स्कूल में 2200 छात्रों के लिए मात्र एक चापाकल है। जहां कतार में लग कर बच्चे पानी पीते हैं। इसके लिए उन्हें कतार में लग कर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। स्कूल परिसर में लगे चापाकल पर भीड़ अधिक होने के कारण शिक्षक व कर्मी अपने साथ बच्चों को सड़क के दूसरी तरफ स्थित पेट्रोल पंप पर बच्चों को पानी पिलाने के लिए ले जाते हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई काफी प्रभावित होती है। स्कूल में एक सबर्मिसबल लगाया गया है। लेकिन उसके खराब होने के कारण वह उपयोगी नहीं है।

इस संबंध में पूछे जाने पर प्रधानाध्यापक महेंद्र यादव ने बताया कि पेयजल की समस्या के संबंध में जिले के वरीय पदाधिकारियों सहित पीएचईडी विभाग को भी चापाकल मरम्मत के लिए कई बार सूचना दी गई। उन्होंने कहा कि पीएचईडी विभाग की कनीय अभियंता पूर्व में विद्यालय में आकर समस्या को देख भी चुकी हैं। लेकिन उसके बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों को भी परेशानी हो रही है।

कनीय अभियंता सीमा कुमारी ने बताया कि सूचना मिली है। सोमवार को विद्यालय में चापाकल मरम्मत के लिए मिस्त्रियों की टीम भेजी जाएगी। जो ठीक योग्य चापाकल होंगे उन्हें ठीक करा दिया जाएगा। बता दें कि आठ मई 17 मिस्त्रियों की टीम को जिलाधिकारी ने खराब चापाकलों की मरम्मत के लिए विभिन्न प्रखंडों में रवाना किया था। अब तक जिले में लगभग 850 खराब चापाकलों की मरम्मत कर दी गई है। जिससे लोगों को राहत मिली है।

Posted By: Jagran

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