पहले और अब के चुनाव में काफी अंतर आ चुका है। इस बदलाव आने के कारण अब लोग सिर्फ मताधिकार का प्रयोग कर रहे है। नेता कौन है कैसे है इस पर विचार बहुत कम लोग कर रहे हैं। पहले चुनाव में नेता के गांव में आने के बाद उसके व्यवहार, उसकी क्षमता को भांप कर मतदान किया जाता था। यह बातें जिले के भगवानपुर प्रखंड के गोबरछ गांव निवासी 82 वर्षीय शोभा कुम्हार ने बताई।

उन्होंने यादों को ताजा करते हुए बताया कि पूर्व में जब भी चुनाव हुए नेता गांव में आने के बाद सभी वर्ग के लोगों के घरों तक पहुंचते थे। वे स्वयं अपने चुनाव चिह्न व अपना परिचय देकर वोट मांगते थे। जिसके चलते चुनाव को लेकर मतदान से काफी पहले चर्चा होने लगती थी। सुबह शाम ग्रामीण आपस में बैठ कर यह चर्चा करते थे कि कौन नेता हमलोगों के लिए सही है और कौन नहीं। ग्रामीणों के सामूहिक निर्णय पर वोट किया जाता था। पहले आज के जैसी व्यवस्था नहीं थी। गांव में नेता टमटम से आते थे। एक गांव में प्रवेश किए तो शाम तक लगातार एक से दूसरे गांव में प्रचार के लिए जाते थे, लेकिन आज नेता किसी-किसी गांव में जाते हैं। नेता सभा कर एक जगह ही लोगों को एकत्रित कर अपना भाषण देकर अपना व अपने चुनाव चिह्न का परिचय दे देते हैं। ऐसे में गांव में रहने वाले कई लोग हैं जो सभा तक नहीं पहुंच पाते और न ही उन्हें किसी प्रकार की जानकारी हो पाती है। इसके चलते मतदान के दिन वे जहां मन वहां वोट कर चले आते हैं। शोभा कुम्हार इस उम्र में भी मतदान के प्रति काफी जागरूक हैं। वे नई पीढ़ी से बढ़-चढ़कर लोकतंत्र के इस महापर्व में शामिल होने की अपील करते हैं। खासकर नए मतदाताओं से कहा कि बिना किसी पार्टी के दबाव में आए अपने बहुमुल्य मत का प्रयोग करे। जिससे देश का सर्वागीण विकास हो सके।

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप