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कैमूर में बिना जांच धड़ल्ले से आरओ पानी की सप्लाई, विभाग मौन

Published: Sun, 12 Apr 2026 07:46 PM (IST)

भभुआ जिले में बिना जांच और अनुमति के आरओ पानी की धड़ल्ले से सप्लाई हो रही है, जिससे लोगों के ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, भभुआ। जिले के शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक इन दिनों आरओ पानी की सप्लाई खूब हो रही है। लोग शुद्ध पानी के नाम पर आरओ पानी पर निर्भर होते जा रहे हैं। वहीं शादी विवाह में भी आरओ पानी की खूब मांग हो गई है।

लेकिन इस पूरी व्यवस्था में सबसे गंभीर बात यह है कि अधिकांश जगहों पर बिना किसी जांच, मानक और अनुमति के पानी की सप्लाई धड़ल्ले से की जा रही है। जिससे लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों पर खतरा मंडरा रहा है।

नगर के मोहल्लों से लेकर सुदूर ग्रामीण इलाकों तक छोटे-बड़े प्लांट लगाकर निजी संचालक पानी की सप्लाई कर रहे हैं। इन प्लांटों के संचालन के लिए न तो किसी प्रकार का लाइसेंस लिया गया है और न ही संबंधित विभाग द्वारा समय-समय पर पानी की गुणवत्ता की जांच की जा रही है।

ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि जो पानी लोगों तक पहुंच रहा है, वह वास्तव में कितना शुद्ध है। यदि मशीनों की समय पर सर्विसिंग नहीं होती या फिल्टर समय पर नहीं बदले जाते, तो पानी में हानिकारक तत्व मिल सकते हैं।

इसके बावजूद प्रशासन की ओर से इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है, जिससे आम जनता अनजाने में जोखिम भरा पानी पीने को मजबूर है। बीते दिनों नगर के पूरब पोखरा के पास स्थित एक प्लांट में दिल्ली से आई एक टीम ने जांच की थी। जिसमें कई मामले सामने आए। इसके बाद भी प्रशासन द्वारा कोई संज्ञान नहीं लिया गया।

वहीं दूसरी ओर, गर्मी के दिनों में लगातार गिरते भूजल स्तर ने स्थिति को और भी चिंताजनक बना दिया है। कई इलाकों में हैंडपंप और कुएं सूखने की कगार पर हैं। ऐसे में आरओ प्लांट संचालक बड़े पैमाने पर भूमिगत जल का दोहन कर रहे हैं। लगभग एक लीटर आरओ पानी तैयार करने में लगभग तीन से चार लीटर पानी बर्बाद हो जाता है।

इस तरह बड़े पैमाने पर पानी की बर्बादी से जल संकट और गहरा सकता है तो वही कई जगहों पर खुले में रखे टैंकों में पानी भरकर घर-घर सप्लाई किया जा रहा है। इसके अलावा प्लास्टिक के कंटेनरों में पानी की ढुलाई और भंडारण भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

प्रशासन को जांच अभियान चलाकर बिना लाइसेंस और मानक के चल रहे आरओ प्लांटों की जांच कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए साथ ही पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि लोगों को सुरक्षित पेयजल मिल सके।

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