नौवें सिख गुरू  श्री तेग बहादुर जी की पावन शहादत की स्मृति में शहीदी गुरूपर्व कुदरा में भव्य तरीके से मनाया गया। यहां के गुरूद्वारा श्री गुरू सिघ सभा में इस मौके पर संपन्न तीन दिवसीय आयोजन में कैमूर जिले के अलावा सासाराम, डेहरी ऑन सोन, डालमियानगर, गया आदि विभिन्न स्थानों से आए हुए बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की शुरुआत शुक्रवार को सुबह में गुरू ग्रंथ साहिब के अखंड पाठ से हुई। समारोह के अंतिम दिन रविवार को भव्य कीर्तन दरबार व अटूट लंगर का आयोजन किया गया। जिसमें हजारों लोगों ने गुरू का महाप्रसाद ग्रहण किया। गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान सरदार अजीत सिंह के नेतृत्व में हुआ आयोजन कमेटी के सेक्रेटरी सरदार करनजीत सिंह की देखरेख में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में जिन लोगों ने प्रमुखता से हिस्सा लिया उनमें सासाराम स्थित ऐतिहासिक गुरूद्वारा चाचा फागु मल साहिब जी के हजूरी रागी जत्था भाई संदीप सिंह, विकास सिंह, राजबीर सिंह, पंकज सिंह, गुरूद्वारा गुरू सिघ सभा डेहरी ऑन सोन के हजूरी रागी जत्था भाई परमजीत सिंह आदि समेत अनेक संत साहिबान शामिल थे। हजूरी रागी जत्था सासाराम खुशबू कौर, रिया कौर, दर्शन कौर, तरंग कौर ने कीर्तन दरबार में शब्द गुरुवाणी प्रस्तुत की। सरदार बलराम सिंह व महेंद्र सिंह ने अरदास की रस्म पूरी की। जत्थेदार सर्वजीत सिंह खालसा ने समागम को संबोधित करते हुए कहा कि मुगल शासक औरंगजेब इस्लामी तहजीब से हटकर सनातन धर्मावलंबियों पर अत्याचार कर रहा था। नवें नानक श्री गुरू तेग बहादुर जी ने कश्मीरी ब्राह्मणों की मदद करते हुए शौर्यपूर्ण शहादत देकर हिदू धर्म व सनातन संस्कृति की रक्षा की। गुरू तेग बहादुर जी के अतुलनीय त्याग और बलिदान के लिए उन्हें हिद दी चादर कहा जाता है।

Posted By: Jagran

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