कैमूर। लोगों की यह आदत पुरानी है, जब तक दर्द है तभी तक दवा की जरूरत है। कुछ ऐसा ही हाल इन दिनों बाजारों में दिखाई पड़ रहा है। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर जब चरम पर थी तो हर ओर सतर्कता बरती जा रही थी। लेकिन जैसे ही संक्रमण की चेन कमजोर हुई तो फिर से वही लापरवाही हर ओर देखने को मिल रही है। ऐसे में संक्रमण का खतरा और भी बढ़ सकता है। लोग पुलिस प्रशासन के डर से चेहरे पर मास्क तो जरूर लगा रहे हैं, लेकिन अपने अंदर कोरोना जैसी बीमारी से बचाव को लेकर सतर्कता का भाव नहीं रख रहे हैं। कई लोगों के मास्क भी नाक के नीचे लटके रहते हैं। दुकानों तथा बाजारों में पहले की तरह ही सामान की खरीद को लेकर आपाधापी मची रहती है। शारीरिक दूरी का कोई मतलब यहां नहीं दिखता है। कोरोना गाइडलाइन के प्रति लोग खुद से सजग नहीं दिख रहे थे। समय सुबह सात बजते ही बाजार में तमाम भीड़ हो रहा है। इन दिनों उमस भरी गर्मी से लोग हलकान परेशान हैं। ऐसे में सुबह का समय मार्केटिग के लिए बेहतर रह रहा है। लोग बाजार की ओर मदमस्त चल रहे है। जगह जगह पर इक्के दुक्के पुलिसकर्मी भी तैनात है, लेकिन वे सिर्फ अपनी मौजूदगी तक ही सीमित रखे हुए है।

कोरोना की गाइडलाइन की पालन में फिर से ढिलाई शुरू हो गई है। ऐसे में जिला को लोग फिर से खतरा में डाल रहे है। संक्रमण काल में सामान लेने देन से पहले दुकानदारों द्वारा ग्राहकों तथा खुद के हाथों को सैनिटाइज कराना जरूरी है। लेकिन जिला में इस नियम का तो कहीं भी इसका अनुपालन नहीं हो रहा है। जब एक दुकानदार से पूछा गया कि क्या आपके पास सैनिटाइजर है तो उसने हां में जवब दिया लेकिन उसने कहा कि अब संक्रमण का प्रभाव कम हो गया है। इसलिए इसकी ज्यादा जरूरत नहीं रह गई है।

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