यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 15, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
मिट्टी जांच प्रयोगशाला की स्थापना से युवाओं को मिलेगा रोजगार
जिले के युवाओं को रोजगारपरक बनाने के लिए कृषि विभाग ने ग्राम स्तर पर मिट्टी जांच प्रयोगशाला की स्थापना करने ...और पढ़ें

जिले के युवाओं को रोजगारपरक बनाने के लिए कृषि विभाग ने ग्राम स्तर पर मिट्टी जांच प्रयोगशाला की स्थापना करने की कवायद शुरू कर दी है। मिट्टी जांच प्रयोगशाला की स्थापना में परियोजना लागत पर अधिकतम 75 प्रतिशत अनुदान भी लाभुक को उपलब्ध कराया जा रहा है। 25 प्रतिशत अंशदान लाभुक को देय होगा।
इस संबंध में जिला कृषि पदाधिकारी ललिता प्रसाद ने बताया कि गांवों में मिट्टी जांच प्रयोगशाला की स्थापना का उद्देश्य यह है कि मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार एवं किसानों की आय में वृद्धि करने के साथ ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार का सृजन करना। साथ ही मृदा परीक्षण में लगने वाले समय को कम करना और किसानों को उनके द्वार पर मिट्टी जांच की सुविधा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि मिट्टी जांच प्रयोगशाला की स्थापना करने वाले आवेदक के पास स्वयं का निजी भवन अथवा कम से कम चार वर्ष के लिए लीज पर किराए का भवन होना अनिवार्य है।
योजना के लिए लाभुक की योग्यता:
ग्राम स्तरीय मिट्टी जांच प्रयोगशाला की स्थापना के लिए आवेदक एवं उद्यमी की योग्यता का निर्धारण किया गया है। इसमें एग्रो क्लीनिक, एग्रो बिजनेस सेंटर, कृषि उद्यमी, भूत पूर्व सैनिक, स्वयं सहायता समूह, कृषि उत्पाद संगठन, कृषि उत्पाद कंपनी, फार्मर ज्वाइंट ग्रुप, कृषक सहकारी समितियों के अलावा पैक्स, खुदरा उपादान विक्रेता के अलावा स्कूल या कॉलेज के लाभुक इसमें शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा आवेदक कम से कम द्वितीय श्रेणी में विज्ञान विषय के साथ मैट्रिक उत्तीर्ण हो और उसे कंप्यूटर की जानकारी भी हो। परियोजना की लागत का अधिकतम 75 प्रतिशत राशि अनुदान देय है। शेष 25 प्रतिशत राशि लाभुक को अंशदान के रूप में समाहित किया गया है। वहीं
