कैमूर की पहाड़ियों में मिला प्रकृति का अद्भुत संसार; 99 प्रजातियों के पक्षी और 244 प्रजातियों के जीव मिले
कैमूर की पहाड़ियों में छह माह के अध्ययन में 238 पौधों और 244 जीव-जंतुओं की प्रजातियों की पहचान की गई है, जिसमें 99 पक्षी प्रजातियां भी शामिल हैं।

कैमूर की पहाड़ियों में जैव विविधता।
HighLights
कैमूर पहाड़ियों में 238 पौधों, 244 जीव-जंतुओं की प्रजातियां मिलीं।
अध्ययन में 17 परिवारों की 99 पक्षी प्रजातियों की पहचान की गई।
क्षेत्र की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्व उजागर हुआ।
जागरण संवाददाता, भभुआ। कैमूर की पहाड़ियां प्राकृतिक संपदा और जैव विविधता की दृष्टि से बेहद समृद्ध हैं। यहां विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों के साथ बड़ी संख्या में जीव-जंतुओं और पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं।
हाल में किए गए एक अध्ययन में कैमूर की पहाड़ियों में 64 परिवारों की 238 प्रजातियों के पौधों की पहचान की गई है। इसके अलावा अलग-अलग वर्गों के जीव-जंतुओं की भी कई प्रजातियां सामने आई हैं।
अध्ययन में 17 परिवारों की 99 प्रजातियों के पक्षियों की मौजूदगी की जानकारी मिली है। इससे कैमूर की पहाड़ियों की समृद्ध जैव विविधता और इसके संरक्षण की जरूरत एक बार फिर सामने आई है।
छह माह तक चला जैव विविधता का अध्ययन
कैमूर पर्वत क्षेत्र में जैव विविधता का यह अध्ययन करीब छह माह तक चला। अध्ययन टीम ने दिसंबर 2025 से क्षेत्र में जाकर पेड़-पौधों, पक्षियों, जीव-जंतुओं और अन्य जैविक संसाधनों का सर्वे किया।
टीम ने पहाड़ी क्षेत्रों के साथ-साथ चट्टानों, गुफाओं, बिलों और दरारों में भी अध्ययन किया। इसका उद्देश्य क्षेत्र में मौजूद विभिन्न प्रजातियों की पहचान करने के साथ उनके संरक्षण के लिए आवश्यक जानकारी जुटाना था।
अध्ययन टीम में पर्वत के वैज्ञानिक अधिकारी भावेश कुमार के अलावा विजयंत जिशिन, डॉ. के. किशोर कुमार, हर्षिता प्रकाश, साक्षी और तथागत अवतार शामिल रहे। टीम ने कैमूर की पहाड़ियों में लंबे समय तक रहकर यहां की प्राकृतिक संपदा का अध्ययन किया।
64 परिवारों के 238 प्रजातियों के पौधे मिले
अध्ययन के दौरान वनस्पतियों के 64 परिवारों की 238 प्रजातियां पाई गईं। इनमें पुष्पीय पौधों के अलावा फर्न, ब्रायोफाइट्स और स्टोनवर्ट्स जैसी वनस्पतियां भी शामिल हैं।
यह आंकड़ा बताता है कि कैमूर का पहाड़ी क्षेत्र केवल जंगलों और सामान्य पेड़-पौधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों का व्यापक संसार मौजूद है।
अध्ययन में जीव-जंतुओं की भी कई प्रजातियों की पहचान की गई। प्रमुख टैक्सोनोमिक वर्गों में 100 से अधिक परिवारों के जीवों की 244 प्रजातियों का उल्लेख किया गया है। इनमें मछलियों की तीन, उभयचरों की पांच और मकड़ियों की 18 प्रजातियां शामिल हैं।
99 प्रजातियों के पक्षी और कीड़े-मकौड़ों की 98 प्रजातियां
कैमूर की पहाड़ियों में पक्षियों की विविधता भी उल्लेखनीय मिली। अध्ययन में 17 परिवारों की 99 प्रजातियों के पक्षी पाए गए। इनमें कई ऐसे पक्षी शामिल हैं, जो पहाड़ी और वन क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
इसी तरह कीड़े-मकौड़ों की 98 प्रजातियों की पहचान की गई। घोंघे और अन्य छोटे जीवों की मौजूदगी भी क्षेत्र की जैव विविधता को समृद्ध करती है।
अध्ययन में केकड़े की दो, सरीसृप वर्ग की आठ और स्तनधारियों की छह प्रजातियां भी मिली हैं। इसके अलावा भृंग (बीटल), तितलियों और अन्य जीवों की प्रजातियों की भी पहचान की गई।
इन स्थानों पर किया गया अध्ययन
कैमूर पठार के कई महत्वपूर्ण स्थलों का आकलन किया गया। इनमें करकटगढ़, तेलहार कुंड, करमचट क्षेत्र, किजियारी पहाड़ियां, तुतला भवानी, रोहतासगढ़, धनकवरा और ताराचंडी के आसपास के क्षेत्र शामिल हैं।
करकटगढ़ में कर्मनाशा नदी और झरने, तेलहार कुंड, करमचट क्षेत्र के जलाशय और किजियारी पहाड़ियों, तुतला भवानी के झरनों, रोहतासगढ़ के किला क्षेत्र, धनकवरा के खनन क्षेत्र व घास के मैदान तथा ताराचंडी के आसपास जैव विविधता का अध्ययन किया गया।
प्राकृतिक संपदा के साथ सांस्कृतिक विरासत भी
कैमूर की पहाड़ियों का महत्व केवल प्राकृतिक संपदा तक सीमित नहीं है। अध्ययन के दौरान क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता का भी आकलन किया गया।
टीम ने पहाड़ियों में मौजूद चल कलाकृतियों, पुरावशेषों और शैलचित्र स्थलों से जुड़ी जानकारी जुटाई। साथ ही गुफाओं, बिलों, दरारों और अन्य प्राकृतिक संरचनाओं का भी अध्ययन किया गया।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि पिछले कुछ वर्षों में कैमूर की पहाड़ियों के कई क्षेत्रों में पर्यटन का विकास तेजी से हुआ है।
कैमूर की पहाड़ियों और करकटगढ़ क्षेत्र में कीड़े-मकौड़ों, पक्षियों, जलीय जीवों, घास और तितलियों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं।
कहते हैं अधिकारी
कैमूर का पहाड़ी क्षेत्र प्राकृतिक संपदा के साथ सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। कैमूर की पहाड़ियों में मिली जैव विविधता के आंकड़े भविष्य में संरक्षण की योजना तैयार करने में महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं।
संजीव रंजन, डीएफओ, भभुआ
