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बिहार के कैमूर में होगा पर्यटन और लोक संस्कृति का संगम, धारा महोत्सव में देशभर से जुटेंगे प्रकृति प्रेमी  

Published: Tue, 29 Sep 2026 03:33 PM (IST)

कैमूर में 6 अक्टूबर को धारा महोत्सव का आयोजन होगा, जिसका उद्देश्य जिले के प्राकृतिक सौंदर्य, जलप्रपातों और समृद्ध लोकसंस्कृति ...और पढ़ें

मां मुंडेश्वरी वन्यप्राणी इको पार्क। फोटो जागरण

 मां मुंडेश्वरी वन्यप्राणी इको पार्क। फोटो जागरण

HighLights

  1. 6 अक्टूबर को मां मुंडेश्वरी इको पार्क में धारा महोत्सव का आयोजन।

  2. कैमूर के जलप्रपात, प्रकृति और लोक संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा।

  3. प्रकृति, वन्यजीव संरक्षण हेतु जागरूकता, स्थानीय कलाकारों को मंच।

जागरण संवाददाता, भभुआ। कैमूर के प्राकृतिक सौंदर्य, जलप्रपातों और समृद्ध लोकसंस्कृति को देश-दुनिया के पर्यटकों तक पहुंचाने के उद्देश्य से छह अक्टूबर को धारा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा।

कैमूर वन प्रमंडल, भभुआ की ओर से मां मुंडेश्वरी वन्यप्राणी इको पार्क में आयोजित होने वाले इस महोत्सव की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। कार्यक्रम दोपहर 2:30 बजे से होगा।

इस वर्ष महोत्सव की थीम हर धारा की अपनी कहानी रखी गई है। वन विभाग के अनुसार प्रत्येक वर्ष 2 से 8 अक्टूबर तक वन्यप्राणी सप्ताह का आयोजन किया जाता है। इसी क्रम में छह अक्टूबर को धारा महोत्सव आयोजित किया जा रहा है।

इसका मुख्य उद्देश्य कैमूर जिले के मनोरम जलप्रपातों को पर्यटकों के बीच लोकप्रिय बनाना तथा लोगों को प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक करना है।

वर्षा के बाद निखर जाती है पहाड़ी

वर्षा के बाद कैमूर की पहाड़ियों और जंगलों में स्थित जलप्रपात अपने प्राकृतिक सौंदर्य के चरम पर होते हैं। करकटगढ़, तेल्हाड़ कुंड, बंसीखोह और करमचट जैसे जलप्रपात पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र हैं।

कैमूर वन्यजीव अभयारण्य की गोद में स्थित ये स्थल प्राकृतिक सौंदर्य के साथ जैव विविधता और स्थानीय संस्कृति की भी पहचान हैं। इसके बावजूद राज्य और देश के पर्यटकों के बीच इन स्थलों को अभी अपेक्षित पहचान नहीं मिल सकी है।

धारा महोत्सव को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। महोत्सव के दौरान जलप्रपातों पर आधारित छायाचित्र प्रदर्शनी लगाई जाएगी।

इसके अलावा लघु वृत्तचित्र के माध्यम से कैमूर के प्राकृतिक स्थलों की जानकारी दी जाएगी। पर्यटकों को जिले के ट्रैकिंग मार्गों और इको-टूरिज्म स्थलों की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए सूचना केंद्र भी लगाया जाएगा।

कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी जाएंगी। लोकगीत और लोकनृत्य के माध्यम से पर्यटकों को कैमूर की लोकसंस्कृति और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया जाएगा।

इससे स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच मिलने के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

वन विभाग का कहना है कि कैमूर के जलप्रपात जिले की प्राकृतिक धरोहर हैं। महोत्सव के माध्यम से जंगल, जल और वन्यजीवों के संरक्षण का संदेश भी दिया जाएगा।

आम लोगों, विद्यार्थियों, पर्यटकों, प्रकृति प्रेमियों और मीडिया प्रतिनिधियों से अधिक से अधिक संख्या में महोत्सव में शामिल होने की अपील की गई है।

कैमूर के जलप्रपात जिले की प्राकृतिक पहचान और अनमोल धरोहर हैं। धारा महोत्सव के माध्यम से इन प्राकृतिक स्थलों की खूबसूरती को देश-दुनिया के पर्यटकों तक पहुंचाने के साथ लोगों को जंगल, जल, वन्यजीव और जैव विविधता के संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा। महोत्सव में स्थानीय लोककला और संस्कृति को भी प्रमुखता दी जाएगी, ताकि पर्यटकों को कैमूर की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने का अवसर मिले। -संजीव रंजन, डीएफओ वन प्रमंडल भभुआ