प्रशासन की सख्ती के बाद नगर पंचायत कार्यालय से सटे सब्जी मंडी में अब सब्जी की दुकानें लगने लगी हैं। दुकानों के सजने के बाद यहां ग्राहकों भीड़ लगने लगी है। जिससे नगर में  लाखों की लागत से बनी सब्जी जो लंबे समय से वीरान पड़ी थी वह गुलजार हो गयी है। ज्ञात हो की एक सप्ताह पूर्व मोहनियां में हुए बवाल के बाद प्रशासन सख्त हुआ। शनिवार से अतिक्रमण हटाओ अभियान चल रहा है। पहले दिन सख्ती से स्टुवरगंज बाजार को अतिक्रमण मुक्त करा दिया गया। सड़क पर अतिक्रमण कर सब्जी बेचने वालों को प्रशासन ने भगा दिया। दुकानदारों को चेतावनी दी गई की स्टुवरगंज बाजार में सब्जी नहीं बिकेगी। जो दुकानदार सब्जी मंडी में अपने नाम से दुकान का  आवंटन कराए हैं वे वहीं दुकान लगाएं। ऐसा नहीं करने पर उनका आवंटन रद्द कर दूसरे को दुकान आवंटित कर दी जाएगी। इसका असर हुआ।

स्टेशन रोड में बनी सब्जी में दुकानें लगने लगीं।वर्षों से वीरान पड़ी सब्जी मंडी के दिन बहुर गए हैं। ज्ञात हो कि 6 नवंबर 2004 को 24 लाख की लागत से मोहनियां में सब्जी मंडी बनकर तैयार हुई थी। जिसका उद्घाटन तत्कालीन सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री मीरा कुमार ने किया था। मौके पर बिहार सरकार के तत्कालीन जल संसाधन मंत्री जगदानंद सिंह भी मौजूद थे। अपने संबोधन में उक्त नेताओं ने सब्जी मंडी को मोहनियां की जरुरत बताया था। सब्जी मंडी को तीन श्रेणियों में बांट कर दुकानदारों से प्राप्त अग्रिम धन राशि से निर्माण कार्य पूरा हुआ था। जिसमें सुपर मार्केट के नाम से 12, फड़ दुकान 62, शेड दुकान 40 सहित 114 दुकानें शामिल हैं। सब्जी मंडी के निर्माण में मोहनियां के तत्कालीन मुखिया सह वार्ड संख्या नौ के वर्तमान वार्ड पार्षद अनिल कुमार सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। तब और दुकान के लिए पांच हजार रुपए एवं शेड दुकान के लिए इच्छुक दुकानदारों से 17 हजार रुपए लिए गए थे। इस राशि का आधा किराया में समायोजित करना था। उद्घाटन के बाद कुछ दिनों तक हर तरह की सब्जियों से यह मंडी गुलजार रही। ग्राहकों को यह सब्जी मंडी बरबस आकर्षित करती थी। एक लाइन से बनी दुकानों में जाने के लिए दो तरफ से रास्ता बना है। ग्राहक शौक से यहां आते थे। एक साल बाद इस सब्जी मंडी के ग्रहण का दौर शुरू हो गया। धीरे-धीरे सब्जी बेचने वालों ने चांदनी चौक और स्टुवरगंज बाजार का रुख किया। सड़क पर अतिक्रमण कर दुकानदार सब्जी बेचने लगे। कोई जमीन पर तो कोई ठेला पर सब्जी बेचने लगा। बस पड़ाव से नजदीक होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के लोग इधर ही सब्जी खरीदने लगे। सब्जी मंडी में ग्राहकों का टोटा पड़ने लगा। वहां के सब्जी विक्रेताओं को लगा कि चांदनी चौक पर बिक्री अधिक है। धीरे धीरे वे ठेला पर सब्जी लेकर स्टुवरगंज बाजार में चले आए। बिक्री में भारी कमी आने से सब्जी मंडी के दुकानदारों को घाटा होने लगा। यहां तक की किराया भुगतान भी घर से ही करना पड़ा। सब्जियों का नुकसान हुआ अलग। स्थानीय प्रशासन दुकानदारों के पलायन व  अतिक्रमण पर रोक मुनासिब नहीं समझा। इसके बाद लाखों रुपए की लागत से बनी सब्जी मंडी वीरान हो गई। स्टुवरगंज बाजार में एक लाइन से जमीन और ठेला पर दर्जनों सब्जी की दुकानें लगने से नगर में जाम की समस्या उत्पन्न होने लगी थी। अतिक्रमणकारियों की मनमानी से विधि व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होने लगी थी। नगर के इस मुख्य बाजार में राहगीरों का चलना मुश्किल होता है। ठेला वाले सब्जी विक्रेता महिलाओं पर फब्तियां कसते थे। मौका मिलने पर महिलाओं से छेड़खानी करने से भी बाज नहीं आते थे। विरोध करने पर राहगीरों से मारपीट पर उतारू हो जाते थे।क्या कहते हैं एसडीएम-

इस संबंध में पूछे जाने पर मोहनियां के एसडीएम शिव कुमार राउत ने कहा कि सब्जी मंडी में दुकानें लगने लगी हैं। किसी भी कीमत पर स्टुवरगंज बाजार में सब्जी नहीं बिकेगी। सड़क पर अतिक्रमण कर सब्जी बेचने वालों को सब्जी मंडी में लाया गया है।दुकानें लगाने से सब्जी मंडी गुलजार हो गई है। जिससे नगर में जाम की समस्या से भी निजात मिलेगी।

Posted By: Jagran

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