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रामगढ़ का राममनोहर लोहिया रेफरल अस्पताल दवा व चिकित्सकों की कमी का दंश झेल रहा है। इस अस्पताल को केवल मैनेजमेंट की बदौलत ही चलाया जा रहा है। प्रखंड कार्यालय परिसर में स्थापित इस रेफरल अस्पताल में कोई सर्जन चिकित्सक नहीं है। सर्जरी के लिए डॉक्टर को आयात करना पड़ता है। 25 बेड के इस रेफरल अस्पताल में आवश्यक दवाएं भी उपलब्ध नहीं है। मौसमी बुखार व खांसी जुखाम के इस सीजन में मरीजों को बाहर से कफ सीरप व दवा लेनी पड़ रही है। अस्पताल में मौजूद रहने वाली 32 प्रकार की दवा में 22 प्रकार की ही दवा मौजूद है। इसमें कई जरूरी दवाएं भी नहीं है। मरीज इन दवाओं के लिए परेशान हो रहे हैं। यहां प्रत्येक दिन औसतन चार मरीज ओपीडी में होते थे। वह घटकर आधे हो गए हैं। सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त रखने व सभी तरह की दवा अस्पताल में उपलब्ध कराने की बात कर रही है। लेकिन धरातल पर दिख नहीं रहा है। साफ सफाई की बदौलत इस अस्पताल की पहचान बनी है। किसी तरह के न तो सर्जन और न ही विशेषज्ञ महिला चिकित्सक की यहां आज तक पोस्टिग हुई है। आयुष चिकित्सकों की बदौलत इस अस्पताल को संवारने की कोशिश हो रही है। यहां 12 चिकित्सकों की जगह मात्र पांच ही चिकित्सक कार्यरत हैं। एनबीएसयू को बने दो साल भी हो गए। लेकिन आज तक इसे चालू नहीं किया जा सका। जिस कारण लगी सब मशीनें शोभा की वस्तु बनकर रह गई हैं। अल्ट्रासाउंड भी वर्षों से बंद है। डिजिटल एक्सरे अस्पताल में लगाने की स्वास्थ्य विभाग की घोषणा धरी की धरी रह गई है।

कुछ दवाएं अस्पताल में नहीं हैं। जिसकी रिपोर्ट जिला को भेजी गई है। कफसीरप को सरकार ने अल्कोहल के कारण बंद कर दिया है। आवश्यक दवाएं दो चार दिन के अंदर अस्पताल में जिला से पहुंच जाएंगी।

- डॉ. सुरेंद्र सिंह, चिकित्सा प्रभारी, रेफरल अस्पताल

Posted By: Jagran

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