कैमूर। जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल की अनिवार्य जांच सेवा अल्ट्रासाउंड व एक्स-रे का कार्य शनिवार को भी ठप रहा। इसके चलते जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए रोगियों की जांच का कार्य प्रभावित होने से उन्हें काफी परेशानी हुई। हालांकि इस संबंध में सीएस ने उपाधीक्षक डॉ. विनोद कुमार को तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करने का निर्देश दे दिया है। पूछे जाने पर उपाधीक्षक ने बताया कि कागजी प्रक्रिया चल रही है। सोमवार तक उक्त सेवा शुरू कराने का प्रयास कराया जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार एनजीओ आइजीइएमएस पटना को सरकार को सदर अस्पताल में निश्शुल्क अल्ट्रासाउंड व एक्सरे सेवा उपलब्ध कराने की संविदा पर जिम्मेदारी सौंपी गई है। पूर्व निर्धारित एकरारनामा के अनुसार 25 अप्रैल तक कार्यकाल वैद्य रहा। इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग के सभी वरीय पदाधिकारियों को थी। इसके बावजूद भी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जा सकी और 26 अप्रैल से उपरोक्त सेवा ठप हो गई। इसके चलते जांच कराने आए रोगियों को बाहर से 150 से 200 रुपये खर्च कर एक्सरे व पांच से छह सौ रुपये खर्च कर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है। विभागीय संवेदनहीनता से अस्पताल आए रोगियों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के दावे पर भी प्रश्न चिन्ह लग गया है। उल्लेखनीय है कि प्रतिदिन औसतन तीन से चार सौ मरीज इलाज कराने के लिए सदर अस्पताल आते हैं। इसमें महिलाएं भी शामिल हैं। जिसमें से लगभग सौ मरीजों को चिकित्सक द्वारा एक्सरे या अल्ट्रासाउंड के लिए प्रतिदिन लिखा जाता है। तीसरे दिन शनिवार को भी उक्त सेवा के ठप रहने से सदर अस्पताल में रोगियों की संख्या अन्य दिनों की अपेक्षा कम दिखाई पड़ी। इसका कारण अल्ट्रासाउंड व एक्सरे की सेवा का ठप होना है। इस संबंध में पूछे जाने पर सीएस नंदेश्वर प्रसाद ने कहा कि एनजीओ के संविदा का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। जिला स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था करने का निर्देश उपाधीक्षक को दिया गया है।

Posted By: Jagran

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