भभुआ : जिला में ई -किसान भवन में कृषि से जुड़े सभी विभाग एक ही भवन में आ गए हैं। जहां से किसानों को ईधर उधर भटकना नहीं पड़ता है। कृषि विभाग के सबसे निचले तल पर बी विश्लेषण लैब रूम बनाया गया है। जहां से किसानों के बीज का अंकुरण की जांच की जाती है। उसके बाद बीज की गुणवत्ता के बारे में बताया जाता है। जानकारी के मुताबिक कैमूर जिले में अब भी तक करीब चार सौ किसानों ने ही अपने फसल को लगाने से पहले अंकुरण की जांच कराई है। उसके बाद खेती में उस बीज का इस्तेमाल किया है। हालांकि जिले में किसान अभी इसमें भाग लेने में काफी पीछे है। जबकि कैमूर जिले में करीब ढा़ई लाख से अधिक किसान निबंधित है। जिसमें महिला व पुरूष दोनों किसान शामिल हैं। जिला कृषि पदाधिकारी रेवती रमन ने बताया कि किसानों को चाहिए कि बीज लगाने से पहले अंकुरण की जांच कर लें, ताकि उसके क्वालिटी का पता चल सके। एक रूपये का शुल्क पर होगा बीज के अंकुरण की जांच: -

लैब में प्रतिनियुक्त सहायक तकनीकी प्रबंधक श्रवण विश्वकर्मा ने बताया कि एक रुपये के शुल्क पर बीज के अंकुरण की जांच की जाती है। किसान अपने फसल का बीज लैब में लाकर गुणवत्ता की जांच की जाएगी। उसके साथ सैंपल को अंकुरण पेपर पर रखकर लैब रूम में उचित तापमान पर रखा जाता है। दो से तीन दिनों के बाद बीज का अंकुरण तथा उसके प्रोन्नति को देखकर यह बताया जाता है कि फसल की गुणवत्ता क्या होगी, और कितना तक उत्पादन हो सकेगा। अंकुरण की जांच कराने से होगा किसानों को फायदा :

फसल के बीज का अंकुरण की जांच कराने पर किसानों को फायदा होगा। इससे पता चल जाएगा कि जो बीज किसान लिया है वह बीज सही है या नहीं । उसका अंकुरण कितना होगा या नहीं होगा। अभी कुछ दिनों पूर्व ही एक व्यक्ति अधौरा के लोहरा गांव का कृषि विभाग में पहुंचा था उसने कहा था कि उसके गांव के कई किसान कृषि विभाग से बीज लिए थे। फसल भी अच्छा लगा, लेकिन उसमें बाली नहीं लगी। इन फसलों का होता है जांच -

कैमूर जिला के कृषि विश्लेषण लैब में गेहूं, मक्का, जौ, मटर, उरद, अरहर, चना, मूंग, सूर्यमूखी, करैला, नेनूआ, भींडी, बिन्स, कोहड़ा, आदि के बीज का एक किलोग्राम तक सैंपल लाना होगा। लौकी के लिए 700 ग्राम, मसूर के लिए 600 ग्राम, धान का 400 ग्राम, 100 ग्राम तिसी, आदि फसलों की जांच होगी।

Edited By: Jagran