जिला कृषि विभाग के तत्वावधान में शनिवार को जिला मुख्यालय स्थित लिच्छवी भवन के सभागार में जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने किया। इस मौके पर उप विकास आयुक्त केपी गुप्ता, कृषि विज्ञान केंद्र अधौरा के वरिष्ठ वैज्ञानिक सदानंद राय, आत्मा के परियोजना निदेशक श्याम बिहारी सिंह, उप परियोजना निदेशक नवीन कुमार सिंह के अलावा कृषि विभाग के अन्य पदाधिकारी व कर्मचारी मौजूद थे। जिला स्तरीय कार्यशाला की अध्यक्षता जिला कृषि पदाधिकारी ललिता प्रसाद ने व संचालन अरुण कुमार पांडेय ने की।

जिलाधिकारी ने कहा कि खेतों में खड़ी फसल के अवशेष को जलाने से जहां मिट्टी की उर्वरा शक्ति नष्ट होती है, वहीं वातावरण पूरी तरह से दूषित होता है। वातावरण के दूषित होने से मानव के जीवन पर कुप्रभाव पड़ रहा है। लोग बीमार हो रहे हैं। इसके अलावा लगातार मिट्टी के जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही है। उर्वरा शक्ति नष्ट होने के कारण फसल के उत्पादन की क्षमता पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि आप लोग अपने स्तर से किसानों को फसल के अवशेष जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में बताएं। उन्होंने कहा कि रासायनिक खाद की जगह पर जैविक खाद का उपयोग करना चाहिए। खेतों में बचे अवशेष को जैविक खाद के रूप में भी प्रयोग लाकर अगली फसल की उत्पादकता को बढ़ाया जा सकता है। जिलाधिकारी ने कहा कि पराली जलाने वाले किसानों को चिह्नित कर उनको मिलने वाली कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हार्वेस्टर में रीपर मशीन लगाने के लिए हार्वेस्टर संचालकों को अनुदानित दर पर उपलब्ध कराया जाएगा। जिलाधिकारी ने कहा कि खेतों में पराली जलाना कानूनन अपराध भी है। कार्यशाला समापन के बाद उपस्थित लोगों ने फसल अवशेष को कभी नहीं जलाएंगे और ना ही किसी को जलाने देंगे, हम फसल अवशेष का प्रबंधन करेंगे, इसके लिए अत्याधुनिक कृषि यंत्रों का प्रयोग करेंगे का संकल्प लिया। कार्यशाला संपन्न होने के बाद जिलाधिकारी ने जागरुकता के लिए दो रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह दोनों अनुमंडल क्षेत्रों में जाकर किसानों को पराली नहीं जलाने के लिए जागरूक करेगी।

Posted By: Jagran

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