जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल में दंत चिकित्सक के उपलब्ध होने के बावजूद जांच के सहायक संसाधनों का अभाव है। जबकि किसी भी व्यक्ति के स्वस्थ रहने में दांत की भूमिका महत्वपूर्ण है। अस्पताल के दंत चिकित्सा विभाग के कक्ष में दस दिन पूर्व में लगाई गई डेंटल मशीन का ट्रायल के अभाव में उपयोग नहीं हो पा रहा है। एक लाख से अधिक की लागत से सरकार के स्तर से सदर अस्पताल को उपलब्ध कराई इस मशीन के क्रियाशील होने से दांत निकालने में होने वाली हल्की सर्जरी का कार्य होना आसान हो जाएगा। वर्तमान समय में ओपीडी में चल रहे डेंटल चिकित्सा कक्ष के माध्यम से औसतन प्रतिदिन 30-35 दांत के मरीजों का इलाज किया जा रहा है। अस्पताल के दवा काउंटर पर दर्द , गैस की दवा के साथ दांत निकालने के समय दिए जाने वाली एंटीबायटिक दवाएं उपलब्ध है। सरकार के स्तर से माउथवाश व मेडिकेटेड पेस्ट की सुविधा फिलवक्त अस्पताल के दवा काउंटर पर उपलब्ध नहीं है। ऐसे में रहा सवाल दांत लगाने का तो उसके लिए लैब की व्यवस्था नहीं है। इस संबंध में पूछे जाने पर उपाधीक्षक डॉ विनोद कुमार सिंह ने कहा कि डेंटल मशीन का ट्रायल शीघ्र कराने के लिए कंपनी के कर्मी से वार्ता की गई है। दांत रोग से संबंधित दवाएं काउंटर पर उपलब्ध है। मिनी लैब की व्यवस्था के लिए पहल की जा रही है।

Posted By: Jagran

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