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IPS Promotion: कैमूर का लाल बनेगा DG, अशोक कुमार सिंह को केंद्र के पैनल में मिली जगह

Published: Mon, 15 Jun 2026 01:08 AM (IST)

कैमूर जिले के इटाढ़ी गांव के मूल निवासी और उत्तर प्रदेश कैडर के 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी अशोक कुमार ...और पढ़ें

अशोक कुमार सिंह। फाइल फोटो

अशोक कुमार सिंह। फाइल फोटो

HighLights

  1. अशोक कुमार सिंह महानिदेशक (DG) की सूची में शामिल।

  2. कैमूर जिले के इटाढ़ी गांव के मूल निवासी हैं।

  3. उत्तर प्रदेश कैडर के 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी।

संवाद सहयोगी, मोहनियां। उत्तर प्रदेश कैडर के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी अशोक कुमार सिंह महानिदेशक (DG) की सूची में शामिल हो गए हैं। इस उपलब्धि से कैमूर जिले का मान बढ़ा है।

अशोक कुमार सिंह भभुआ प्रखंड के सोनहन थाना के इटाढ़ी गांव के स्व. सीताराम के पुत्र हैं। मंत्रिमंडल नियुक्ति समिति द्वारा महानिदेशक एवं इसके समकक्ष पदों पर नियुक्ति के लिए जारी सूची में इनका नाम शामिल है।

इसकी सूचना मिलते ही इनके पैतृक गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। 1995 बैच के आइपीएस अधिकारी इटाढ़ी के इस लाल ने गांव की माटी से निकलकर उत्तर प्रदेश में कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी की मिसाल पेश करते हुए कई महत्वपूर्ण पदों को सुशोभित किया है।

इटाढ़ी गांव में हुई प्रारंभिक शिक्षा

अशोक कुमार सिंह ने गांव के प्राथमिक विद्यालय से पांचवी कक्षा तक पढ़ाई की। इसके बाद सैनिक स्कूल तिलैया हजारीबाग झारखंड में नामांकन कराया। यहां से इंटर की परीक्षा पास की। रामजस कॉलेज दिल्ली से भौतिकी (प्रतिष्ठा) में स्नातक की डिग्री हासिल की।

यूपी में विभिन्न पदों को किया सुशोभित

बहनोई मोहनियां के बीडीओ मानेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी के तौर इन्होंने विभिन्न जिलों में एसपी और एसएसपी के रूप में सेवा दी। इसके अलावा आईजी साइबर क्राइम, आईजी क्राइम,एडीजी ट्रैफिक,एडीजी इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम 112, एडीजी भर्ती एवं प्रोन्नति के पद पर कार्यरत रहे।

केंद्र सरकार के अंतर्गत इनके द्वारा 2012 से 2019 तक सात वर्षों तक सेवा दी गई। इस अवधि में सीमा सशस्त्र बल डीआईजी ऑपरेशन, इंटेलिजेंस इत्यादि पदों को सुशोभित किया।

सीमा सशस्त्र बल (एसएसबी) फ्रंटियर हेड क्वार्टर पटना में आईजी के पद पर कार्यरत रहे। स्वजनों व ग्रामीणों ने कहा कि अशोक कुमार सिंह बहुत सरल व नेक दिल इंसान है। आम आदमी की तरह इनका घर पर आना होता है। इस दौरान ग्रामीणों को आदर, मान व स्नेह देते हैं।

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