लघु सिचाई विभाग की देखरेख में जिले के सभी प्रखंड क्षेत्रों में किसानों को खेतों की पटवन करने के लिए राजकीय नलकूप लगाए गए हैं, लेकिन वर्तमान समय में 88 नलकूप बंद पड़े हैं। क्योंकि इनकी मरम्मत की तरफ किसी का ध्यान नहीं है। विभाग का दावा है कि इनकी मरम्मत के लिए प्राक्कलन बना कर भेजा गया है। जिसका टेंडर प्रक्रियाधीन है। राजकीय नलकूपों के संबंध में पूछे जाने पर कार्यपालक अभियंता उमाशंकर सिंह ने बताया कि जिले के सभी प्रखंड क्षेत्रों में किसानों को राजकीय नलकूप के माध्यम से सिचाई के लिए पानी की उपलब्धता कराने के लिए 346 जिले में कुल राजकीय नलकूप लगाए गए हैं। जिसमें से 258 राजकीय नलकूप संचालित हैं। जबकि 88 राजकीय नलकूप खराब पड़े हैं। उन्होंने खराब पड़े नलकूपों के संबंध में कहा कि इन नलकूपों की मरम्मत के लिए प्राक्कलन बना कर मुख्यालय को भेजा जा चुका है। जहां पर मरम्मत के लिए टेंडर का कार्य प्रक्रियाधीन है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के निर्देशानुसार अब राजकीय नलकूपों की देखरेख का कार्य व राजकीय नलकूप की व्यवस्था पंचायतों को सौंप दी गई है। उन्होंने कहा कि अब राजकीय नलकूपों की व्यवस्था पंचायत के अधीन रहेगी। उन्होंने बताया कि राजकीय नलकूप कुदरा प्रखंड में 16 हैं। जिसमें से चालू हालत में तीन व दस बंद पड़े हैं। जबकि मोहनियां प्रखंड में कुल 28 नलकूप हैं। इसमें पांच चालू व 23 बंद हैं। भभुआ प्रखंड में नौ नलकूप हैं। जिसमें चार बंद हैं और पांच चालू हैं। रामगढ़ में 50 नलकूप हैं, जिसमें 34 चालू हैं और 16 बंद। दुर्गावती में 42 राजकीय नलकूप हैं, जिसमें 35 चालू हैं और सात बंद हैं। चांद में छह राजकीय नलकूप हैं, जिसमें चार बंद हैं और दो चालू हैं। नुआंव प्रखंड में 25 नलकूप हैं। जिसमें 12 बंद हैं और 13 चालू हैं। वहीं फेज तीन योजना के अंतर्गत 15 राजकीय नलकूप हैं। आठ फेज के अंतर्गत 39 व फेज 11 के तहत 103 राजकीय नलकूप संचालित हैं।

Posted By: Jagran

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