प्रखंड विकास पदाधिकारी मयंक कुमार ¨सह ने गुरुवार 38 शिक्षकों का कागजात जमाया कराया। जिनका 2008 में नियोजन हुआ था। बता दें कि इन शिक्षकों के नियोजन के संदर्भ में बीडीओ ने डीईओ कामेश्वर कामती को पत्र लिख कर मार्गदर्शन मांगा था। जिसमें लिखा है कि अपीलीय प्राधिकार द्वारा दिए गए आदेश में नियोजित शिक्षक चार से पांच माह तक पठन-पाठन का कार्य किए। फिर डीईओ एवं बीईओ भगवानपुर के मौखिक आदेश पर शिक्षकों को हटा दिया गया। इसके बाद शिक्षक भटकते रहे। पुन: मार्च 2017 में शिक्षकों ने दूसरी बार जिला में अपील की। तथ्यों का अवलोकन करने पर बीडीओ ने डीईओ से मार्गदर्शन मांगा है। उन्होंने लिखा है कि क्या मौखिक आदेश पर सभी शिक्षक का पठन-पाठन का कार्य बंद कर देंगे, आदेश लिखित में रहा होगा जो कि उस समय निर्गत पंजी से देखा जा सकता है। क्या शिक्षक पांच महीने पढ़ाने के बाद हटाए जाने पर ससमय न्यायालय यथा जिला पदाधिकारी न्यायालय, राज्य अपीलीय प्राधिकार, हाईकोर्ट पटना क्यों नहीं गए। पांच साल क्यों भटकते रहे? हो सकता है इन शिक्षकों के पास अपने सही नियोजन से संबंधित कोई साक्ष्य नहीं रहा हो। क्योंकि नियोजन ही गलत था, ऐसा माना जा सकता है। इन दिनों लगातार हो रहे शिक्षकों के नियोजन पर लोगों में काफी चर्चा का विषय बना हुआ था कि आखिर ये शिक्षक कैसे बाहल होकर शिक्षण कार्य में लगाया जा रहा है। क्योंकि इतने लंबे समय तक इन लोगों का कोई ठिकाना नही था। विभागीय सूत्रों कर्मचारी ने बताया कि कुछ शिक्षक अपने दस्तावेज को स्कै¨नग कराकर अपनी बहाली की दावेदारी कर नियोजन में शामिल हुए हैं। बहरहाल यह जांच का विषय है। जांच के बाद ही इस मामले का खुलासा हो सकता है। नियोजित शिक्षक सही है या गलत। जल्द ही खुलासा होने की बात बीडीओ मंयक कुमार ¨सह ने कही।

Posted By: Jagran

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