जिले का रामपुर प्रखंड अन्य प्रखंडों से किसी मायने में कम नहीं है। बिहार की चर्चित योजना दुर्गावती जलाशय भी इसी प्रखंड में आती है। इसके अलावा पहाड़ियों की तलहटी में बसे इस प्रखंड की सुंदरता भी मनमोहक है। इस प्रखंड में विकास के कई कार्य भी कराए गए। प्रखंड का विकास होने से लोगों को कई तरह की सुविधाएं भी उपलब्ध हुई। लेकिन आज भी लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल रही है। इसको लेकर आज भी रामपुर प्रखंड के लोगों में काफी मायूसी है। ऐसा नहीं कि इस प्रखंड में स्वास्थ्य केंद्रों की कमी है। इस प्रखंड में कुल 13 स्वास्थ्य केंद्र हैं। जिसमें 11 उप स्वास्थ्य केंद्र, एक अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है। लेकिन आबादी बढ़ने के बावजूद इन स्वास्थ्य केंद्रों को बेहतर नहीं बनाया जा रहा है। कुछ को अपना भवन नहीं है तो कुछ केंद्रों में चिकित्सक व संसाधन ही नहीं है। इसके चलते प्रखंड की लगभग दो लाख की आबादी आज भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा से वंचित है। चिकित्सकों की संख्या नहीं बढ़ाए जाने से मरीजों को रेफर करने की विवशता उपस्थित चिकित्सकों की हो जाती है।

भवन के अभाव में मृत प्राय: हैं कुछ केंद्र -

रामपुर प्रखंड में ठकुरहट गांव में एपीएचसी है। इसके अलावा अमांव, सबार, झाली, जलालपुर, कुड़ारी, मईडाढ़, पसाई, नौहट्टा, खरेंदा, बड़कागांव में उप स्वास्थ्य केंद्र हैं। इसमें झाली व कुड़ारी में अपना भवन नहीं है। अमांव में भवन है लेकिन कर्मी नहीं है। वहीं झाली में कर्मी हैं लेकिन अपना भवन नहीं है। इसके चलते इन स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों का इलाज नहीं हो पाता है। इन स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों का इलाज नहीं होने से मरीजों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रामपुर का सहारा रहता है। लेकिन इन अस्पतालों में भी चिकित्सकों की कमी के चलते मरीजों को रेफर ही कर दिया जाता है। बीते जून माह में रामपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से 25 मरीजों को रेफर किया गया है। इससे यह पता चलता है कि दुर्घटना में घायल या गंभीर रोग से पीड़ित मरीजों का इलाज रामपुर प्रखंड के किसी स्वास्थ्य केंद्र में संभव नहीं है।

भवन बना चकाचक, बेड की नहीं बढ़ी संख्या -

रामपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन वर्तमान समय में रंगाई-पोताई करा कर चकाचक बना दिया गया। लेकिन इसमें बेड की संख्या नहीं बढ़ाई गई। मात्र छह बेड उपलब्ध है। ऐसे में मरीजों की संख्या बढ़ने पर कर्मी व चिकित्सक फर्स पर मरीजों को लेटा कर इलाज करते हैं। चिकित्सकों की कमी के साथ साथ ड्रेसर कंपाउंडर का पद करीब 10 वर्षो से रिक्त है। इस स्थिति में दुर्घटना या मारपीट कर आने वाले मरीज को टांका देने से लेकर बैंडेज पट्टी तक का कार्य भी एएनएम द्वारा ही किया जाता है। इस अस्पताल में 32 दवा होना चाहिए। लेकिन केवल 26 दवा ही अस्पताल में उपलब्ध है।

पूरे प्रखंड में मात्र एक चिकित्सक हैं कार्यरत -

सबसे गंभीर विषय यह है कि रामपुर प्रखंड में मात्र एक चिकित्सक पीएचसी में हैं। वह भी प्रभारी हैं। 11 उप स्वास्थ्य केंद्र तो एएनएम के सहारे ही चल रहे हैं। वहीं एक एपीएचसी में भी चिकित्सक नहीं है। जब चिकित्सकों की इतनी घोर कमी है तो कर्मियों की कमी का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। प्रतिदिन लगभग सौ मरीज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज कराने के लिए आते हैं। जिनका इलाज एक मात्र चिकित्सक डॉ. प्रमोद कुमार करते हैं। बीते दिनों एक महिला चिकित्सक डॉ. गीता थी। लेकिन उन्हें एक दिन पूर्व ही स्थानांतरण होने पर विरमित कर दिया गया।

क्या कहते हैं पदाधिकारी - इस संबंध में पूछे जाने पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि प्रखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ सभी लोगों को उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से देने का भरपूर प्रयास किया जाता है। प्रखंड के कुछ उप स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति ठीक नहीं। कहीं भवन नहीं है तो कहीं कुछ और समस्या है। जिसके बारे में वरीय पदाधिकारियों को पत्राचार पूर्व में भी किया गया था। पुन: पत्राचार कर समस्याओं के समाधान के लिए आग्रह किया जाएगा।

Posted By: Jagran

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