विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बिहार: सिमुलतला आवासीय विद्यालय में सिलेक्शन के बाद भी नहीं मिला एडमिशन, छात्र ने CM और PM से लगाई गुहार 

Published: Sat, 22 Aug 2026 03:28 PM (IST)

बिहार बोर्ड की नियमावली के कारण सिमुलतला आवासीय विद्यालय में बिहार के बाहर से दसवीं पास छात्रों का प्रवेश रोका ...और पढ़ें

सिमुलतला आवासीय विद्यालय। फाइल फोटो

सिमुलतला आवासीय विद्यालय। फाइल फोटो

HighLights

  1. बिहार बोर्ड की नियमावली पर बड़ा सवाल।

  2. बाहर से पढ़े छात्रों का प्रवेश रोका गया।

  3. अभिभावक ने पीएम-सीएम से शिकायत की।

अरविंद कुमार सिंह, जमुई। बिहार बोर्ड की नियमावली और उसकी एक चूक ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब यह यक्ष प्रश्न बन गया है कि बिहार से बाहर पढ़ाई करना अपराध है! अगर नहीं तो बाहर पढ़ने वाले बिहारी बच्चे सिमुलतला आवासीय विद्यालय में पढ़ने के पात्र क्यों नहीं हो सकते?

बिहार से बाहर पढ़ने वाले लाखों बिहारी छात्रों का यह सवाल सिमुलतला आवासीय विद्यालय प्रवेश परीक्षा में उत्तीर्ण एक छात्र के अभिभावक ने खड़ा किया है। यह अवसर भी बोर्ड ने ही दे दिया है।

दरअसल, सिमुलतला आवासीय विद्यालय की 11वीं कक्षा में प्रवेश के लिए 8 मई को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा सूचना प्रकाशित की गई थी।

उक्त सूचना में ही चौथे क्रम पर पात्रता की शर्तों में आवेदक को बिहार राज्य का निवासी होने के साथ ही बिहार में अवस्थित सक्षम प्राधिकार से मान्यता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय से कक्षा दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण होना भी अनिवार्य बताया गया है, इसके बावजूद सीतामढ़ी के रवि कुमार ने अपने पुत्र प्रणव आनंद का ऑनलाइन आवेदन दाखिल कर दिया।

छात्र को उठाना पड़ा बोर्ड की चूक का खामियाजा 

यहां यह बताना लाजिमी है कि प्रणव पटियाला में रहकर पढ़ाई कर रहा है और वहीं से वह मैट्रिक की परीक्षा भी उत्तीर्ण हुआ है। अब यहां पात्रता की शर्तों के मुताबिक, कायदे से आवेदन निरस्त हो जाना चाहिए था, लेकिन बोर्ड से यहीं चूक हो गई और इसके बाद चूक-दर-चूक होती चली गई। उक्त छात्र का एडमिट कार्ड जारी हो गया।

वह परीक्षा में सम्मिलित भी हुआ और परिणाम भी आ गया। इसके बाद मेडिकल जांच के लिए बुलावा आया और 15 जुलाई को सिमुलतला आवासीय विद्यालय में हुई मेडिकल जांच में बच्चा फिट भी हो गया।

फिर काउंसलिंग के पश्चात अंतिम सूची जारी हुई। उसके आधार पर 18 जुलाई को यह सूचित किया गया कि 22 जुलाई तक तमाम कागजात लेकर विद्यालय पहुंचना सुनिश्चित करें।

अभिभावक का कथन है कि 18 अगस्त को सूचना मिलने के पश्चात उन्होंने सबसे पहले विद्यालय परित्याग प्रमाण-पत्र ले लिया, लेकिन आधी रात के करीब वाट्सऐप ग्रुप में ही एक सूचना प्रसारित हुई कि बिहार के बाहर से मैट्रिक पास करने वाले बच्चों का नामांकन नहीं होगा।

सीएम और पीएम से लगाई गुहार

बकौल अभिभावक, इसके बाद से बच्चा सदमे में चला गया है। उसे अब यह चिंता खाए जा रही है कि वह न यहां का रहा और न ही वहां का। अभिभावक रवि कुमार ने इन्हीं बिंदुओं को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री कार्यालय में अपनी शिकायत दर्ज कराई है।

उन्होंने कहा है कि अगर हमने गलत आवेदन कर दिया तो उसे देखना बोर्ड का काम था, लेकिन बच्चा जब उत्तीर्ण हो गया। मेडिकल से लेकर तमाम प्रक्रिया में भी खरा उतरा। उसके बाद नामांकन से वंचित होना किसी भी बच्चे के लिए मानसिक तनाव का कारण बनना लाजिमी है।

ऐसा ही उनके बच्चे के साथ भी हुआ। उनका कहना है कि बिहार की बड़ी आबादी मेहनत-मजदूरी के लिए परिवार के साथ बिहार से बाहर रहता है। वहीं साथ रहकर बच्चों को भी पढ़ाता है। ऐसे में विचारणीय सवाल है कि साथ रखकर बच्चों को पढ़ाना अपराध है ?

प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन की पात्रता और तिथि से संबंधित जारी सूचना में ही स्पष्ट था कि बिहार के ही किसी माध्यमिक विद्यालय से मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण बच्चे आवेदन के पात्र होंगे। इसके आधार पर ही उन लोगों ने नामांकन से पहले इसे डिटेक्ट कर लिया। शायद नामांकन हो जाता तो और भी बड़ी मुसीबत होती। - शुभम शेखर, प्राचार्य, सिमुलतला आवासीय विद्यालय, जमुई